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महिला-पुरुष को समान लाभ मिले
भारत में लक्ष्मी के रूप में पूजी जाने वाली स्त्री स्वयं समृद्धि से वंचित रह जाती है। कार्य में दक्षता और भरपूर मेहनत के बावजूद उसे सही अर्थों में प्रतिदान नहीं मिल पाता। मैं खुश हूँ कि आज कम से कम यहाँ स्त्री के हक की बात करने के लिए विशेषज्ञ एकजुट हुए हैं।

सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता मंत्री श्रीमती मीरा कुमार ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने संयुक्त ाष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की भारतीय इकाई द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मिनार का औपचारिक शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि स्त्री शिक्षा तथा निपुणता को बढ़ावा देने वाले कार्यों की तादाद बढ़ाने की आवश्यकता है। यह एक अच्छा संकेत है कि ऐसी पहल की जा रही है।

व्यापारिक क्षेत्रों में किए जाने वाले सकारात्मक प्रयासों से महिलाओं की सामाजिक स्थिति तथा निर्णय क्षमता में भी इजाफा होगा। सेमिनार के अंतर्गत व्यापार नीतियों में लैंगिक संवेदनशीलता की ओर विषय पर विश्लेषकों तथा विशेषज्ञों ने विचार प्रकट किए।

इस अवसर पर अंकटाड के महासचिव डॉ. सुपाचाई पानिचपकड़ी ने कहा कि व्यापारिक निष्पादन तथा महिला सशक्तीकरण के अंतर्संबंधों के महत्व की विस्तारपूर्वक व्याख्या की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारिक विकास तथा वृद्धि में महिलाओं का महत्वपूर्ण स्थान है, जिसे सरकार को भी ध्यान में रखना होगा।

कार्यक्रम में मुख्यतः लघु उद्योगों तथा हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं को लाभ पहुँचाने की बात कही गई। आयोजन में वित्त सचिव श्री जीके पिल्ल्ई, अंकटाड के डिप्टी प्रोजेक्ट को-ऑर्डीनेटर अभिजीत दास, अंकटाड की कार्यकारी संयुक्त महासचिव सुश्री लक्ष्मी पुरी तथा डीफेड (अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग, ब्रिटेन) के श्री क्रिस मॉर्गट्रॉयड भी उपस्थित थे।
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