उत्तर भारतीयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के अपने रुख को जायज ठहराते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने आज कहा कि आंदोलन कतई असंवैधानिक नहीं है।
मराठी समाचार पत्र में यहाँ प्रकाशित पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान पीएमओ में उनके सहयोगी रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि देश के अन्य भाग को रहने दीजिए केवल महाराष्ट्र में सभी राजनीतिक दल कभी न कभी राजनीतिक हिंसा और राजनीतिक हत्या में शामिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मीडिया विशेषकर हिंदी और अंग्रेजी मीडिया ने एकजुट होकर मेरे खिलाफ रिपोर्टिंग की। लेकिन मेरी पार्टी के एक भी कार्यकर्ता ने किसी भी मीडियाकर्मी को न तो मौखिक रूप से और न ही शारीरिक रूप से निशाना बनाया। उत्तरप्रदेश और बिहार के नेता तथा उत्तर भारतीय पत्रकारों ने यह जताने की कोशिश की कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं गुंडागर्दी के तहत कर रहे हैं।
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भतीजे राज ने कहा कि वित्तीय, सांस्कृतिक और राजनीतिक हित जुड़े होने के कारण उन्होंने, नेता और मीडिया ने ऐसा किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हत्या में शामिल नेता महाराष्ट्र आकर मुझे अहिंसा का पाठ सीखा रहे हैं। पत्रकार उनके सुर में सुर मिलाकर मुझे और मेरे कार्यकर्ताओं को गुंडा बता रहे है।
उसी पत्र में प्रकाशित राज ने अपने पत्र में कुलकर्णी को लिखा है पूर्व वामपंथी होने के नाते आपको पता होगा कि वामपंथी आंदोलन के दौरान लाखों हत्याएँ की गई।
अपने चचेरे भाई और शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना उन्होंने कहा हाल के दिनों में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच समझौते के तहत प्रदर्शन का आयोजन किया गया। बड़े-बड़े मोर्चे निकाले गए। उसके बाद नेता और उनके सहयोगी घर गए और आराम से सोए।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मेरे विरोध प्रदर्शन की आलोचना कर उसे असंवैधानिक बताया, लेकिन उन्हें उस समय इसका पता नहीं था जब उन्होंने राम मंदिर मुद्दे पर रथ यात्रा निकाली।
राज ने कहा कि उस समय बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और कई लोग मारे गए, लेकिन उन्होंने यात्रा जारी रखी। मैंने कभी नहीं सुना कि गोधरा हत्याकांड के बाद आडवाणी ने यह मुद्दा नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाया।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख ने कहा कि हम गुजराती गर्बा और बंगाली नवरात्र में शरीक होते हैं। जब दक्षिणी भारतीय अयप्पा की पूजा करते हैं, मराठी लोग विशेष प्रार्थना का आयोजन करते है। राज ने कहा कि लेकिन मुंबई में छठ पूजा धार्मिक त्यौहार के रूप में नहीं मनाया जाता, बल्कि यह बिहारी नेताओं को अपनी ताकत दीखाने का जरिया बन गया है।
राज ठाकरे ने कहा कि जब दूसरे राज्य के लोग गणेश पूजा का आयोजन करते हैं तब क्या वे शरद पवार, गोपीनाथ मुंडे, बलासाहेब ठाकरे, विलासराव देशमुख या सुशील कुमार शिंदे जैसे महाराष्ट्र के नेताओं को निमंत्रण देते है। उन्होंने कहा कि मेरे पास उस खबर की कतरन है, जिसमें अमिताभ बच्चन ने कहा था कि हालाँकि वह दिल्ली, कोलकाता, मुंबई में रहते हैं, लेकिन उनकी पहचान छोरा गंगा किनारे वाला (पैतृक राज्य उत्तर प्रदेश) ही है।
राज ने कहा कि हम उत्तरप्रदेश या बिहार के प्रवासी मजदूरों या आम आदमी के खिलाफ नहीं है। अगर कोई मेजबान के घर (महाराष्ट्र) जैसा आचरण करता है, हम उसका स्वागत करते हैं, लेकिन अगर कोई गुंडागर्दी के बल पर मेजबान के घर को बदलना चाहता है, तो हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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