खाना बनाने से मना करने पर पत्नी को तलाक देने का निर्णय अदालत की नजर में एक वैध कारण नहीं है। कन्याकुमारी स्थित एक इंजीनियर की तलाक की याचिका खारिज करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ के न्यायधीश जी. राजसुरैया ने आदेश दिया कि पत्नी द्वारा खाना बनाने से मना करने पर उसे तलाक देना कल्पना से परे है।
वर्ष 1999 में शादी रचाने वाले इंजीनियर ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी को चाकू से डर लगता था, इसलिए उसने खाना बनाने से मना कर दिया। इससे इंजीनियर को शारीरिक व मानसिक आघात लगा। न्यायधीश ने कहा कि अगर कोई पति अपनी पत्नी से खाना पकाने की उम्मीद करता है और पत्नी खाना नहीं बनाती तो इसे तलाक का आधार नहीं बनाया जा सकता।
गौरतलब है कि नगरकायल में एक प्रमुख उप न्यायाधीश ने वर्ष 2004 में इंजीनियर को अपनी पत्नी से तलाक लेने की इजाजत दे दी थी, लेकिन महिला द्वारा अपने पति के साथ जीवन गुजारने की इच्छा जाहिर करने पर एक जिला अदालत ने उस आदेश को पलट दिया था।
इंजीनियर ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। न्यायधीश राजसुरैया ने कहा कि इस मामले में यह बिल्कुल साफ है कि पत्नी के प्रति पति का रवैया ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि याची ने अपनी पत्नी की ओर इस तरह से देखना शुरू कर दिया मानो वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो और उसने जानबूझकर खाना बनाने से मना किया हो।
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