मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > प्रादेशिक
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
पत्रकारिता पर बाजारवादी ताकतें हावी
प्रख्यात पत्रकार कुलदीप नैयर ने पत्रकारिता पर बाजारवादी और उपभोक्तावादी ताकतों के बढ़ते प्रभाव पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि अब खबरों में आम आदमी ग्रामीण क्षेत्रों और गरीबों की दशा पर केंद्रित खबरों को कोई स्थान नहीं मिल रहा है।

नैयर ने शनिवार को यहाँ 'मीडिया रिलेशंस रोटेरी पब्लिक एमेज एंड रिर्सोसेज' कार्यक्रम में कहा कि आज के सभी अखबार और टेलीविजन चैनल उपभोक्तावादी संस्कृति का अंधानुकरण कर रहे हैं और सिर्फ बड़ी-बड़ी कंपनियों शॉपिंग काम्पलेक्सों तथा बाजार की उठापटक पर ही ध्यान दिया जाता है जबकि इनका आम आदमी से कोई लेना देना नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि आज हम हर क्षेत्र में पश्चिमी जगत की अंधीदौड़ में शामिल होकर अपने नैतिक मूल्यों सामाजिक सरोकारों को भूलते जा रहे हैं जबकि वे देश इस प्रवृत्ति से काफी पहले उब चुके हैं और वे भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम' की तरफ देख रहे हैं।

नैयर ने कहा कि मैं उपभोक्तावाद के खिलाफ नहीं हूँ और आर्थिक प्रगति का समर्थक हूँ लेकिन उस नौ दस प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर का कोई मतलब नहीं है जहाँ देश के पिछड़े इलाकों में गरीबों को भूखे पेट सोना पड़ता है। गरीब भी इसी देश का हिस्सा हैं, उनकी भुखमरी, गरीबी और बदतर हालत पर भी थोड़ा बहुत ध्यान देना होगा।

आज समाचारों में कारपोरेट जगत और व्यापारिक घरानों तथा राजनीति को अधिक तरजीह दी जाती है। आज देश में लोकतंत्र तो है लेकिन कुछ मुट्‍ठी भर धनी लोग ही बाजार और देश की दशा तय कर रहे हैं क्योंकि मीडिया पर भी कुछ व्यापारिक घरानों का कब्जा हो गया है।

पत्रकारिता के पेशे में पिछले कुछ समय से काफी गिरावट आई है और संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत प्रेस की आजादी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन रोटेरी इंटरनेशनल और एग्रीकल्चर एंड आर्गेनिक फार्मिंग ग्रुप ने किया था।
और भी
सांप्रदायिक सद्भावना की अद्‍भुत मिसाल
देखिए जोधा अकबर के बेशकीमती गहने
राकांपा से गठबंधन नहीं-सोनिया
बस नदी में गिरी, 18 लोगों की मौत
पूर्व विधायक का अपहृत पौत्र बरामद
6 हजार किलो विस्फोटक जब्त