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सांप्रदायिक सद्भावना की अद्‍भुत मिसाल
गुजरात के राजकोट का एक हिंदू-मुस्लिम दंपति झोपड़-पट्टी में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर न सिर्फ उनका बचपन सँवारने की कोशिश करता है, बल्कि उन्हें नए भविष्य की राह भी दिखाता है।

जीतू और रेहाना ने पाँच साल पहले गैर सरकारी संगठन 'विश्वानीदाम' बनाकर यह कार्य शुरू किया था। जीतू ने अहमदाबाद की रेहाना से 2002 में विवाह किया था, जब गुजरात सांप्रदायिक दंगों की आग में जल रहा था।

तब से यह दंपति न सिर्फ सांप्रदायिक सद्भावना की मिसाल कायम कर रहा है, बल्कि राजकोट के छोटूनगर, लक्ष्मीनगर, शांतिनगर और आणंद पार झोपड़-पट्टी क्षेत्रों के बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा देकर उन्हें नियमित स्कूलों में लौटने को प्रोत्साहित कर रहा है।

रेहाना और जीतू खुद राजकोट के सिरे पर एक गाँव में बसे हैं और अब तक लगभग 400 बच्चों को, जो कचरा बीनने अथवा घरेलू कार्यों में लगे थे, को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर चुके हैं।
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