शुक्रवार को पूर्व विधायक मोहम्मद रफी सिद्दीकी के 12 वर्षीय पौत्र मोहम्मद साद के अपहरण की साजिश करने वाले उसके पिता सहित पुलिस ने दो अन्य महिलाओं को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस द्वारा इतने कम समय में अपहरण को पर्दाफाश करने तथा मो. साद को सकुशल बरामद करने के लिए पुलिस महानिरीक्षक (लखनऊ जोन) एके जैन द्वारा 10 हजार रुपए का नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति प्रत्र दिया गया तथा इस मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले एक पीसीओ के मालिक आदिल को एक हजार रुपए का नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र दिया गया।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को अशरफाबाद चौक निवासी पूर्व विधायक मोहम्मद रफी सिद्दीकी के पौत्र साद जो कि सीएमएस बाल्दा में कक्षा छठी कक्षा का छात्र है, अपने घर के पास की मस्जिदे नूर में नमाज अदा करने गया था और फिर घर वापस नहीं आया। साद के दादा के मोबाइल फोन पर अपहरणकर्ताओ ने 75 लाख रुपए फिरौती की माँग की थी।
इस पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने परेश पाण्डेय (पुलिस अधीक्षक पश्चिम) के नेतृत्व में एक टीम का तत्काल गठन किया, जिसमें क्षेत्राधिकारी चौक चिरंजीवनाथ सिन्हा, प्रभारी निरीक्षक डीके राय, चौकी प्रभारी नक्खास पंकज कुमार सिंह एवं आरडी मिश्रा, चौकी इंचार्ज (चढ़ाई) माहू लाल थे। उन्हें अपहरण के इस मामले पर काम करने का जिम्मा सौंपा।
जिस नम्बर से फिरौती की रकम माँगी गई थी, उसके बारे में पता करने पर ज्ञात हुआ कि यह नम्बर खदरा के किसी पीसीओ का है। पुलिस द्वारा उस पीसीओ मालिक की सूचना पर पुलिस ने वह मोटरसाइकिल का नम्बर यूपी0 41डी0/8809 हासिल कर लिया, जिस पर बैठकर वह व्यक्ति पीसीओ आया था।
मोटरसाइकिल का नम्बर बाराबंकी का था, जिस पर पुलिस अधिक्षक बाराबंकी से सम्पर्क किया और यह पता लगाया कि यह गाड़ी नाज बानो पुत्री सिराजुद्दीन थाना देवा बाराबंकी की है। देवा पुलिस द्वारा दबिश देने पर वहाँ कोई नही मिला, किन्तु अभियुक्तगणों का भेद खुल गया। नाजबानों की शादी आफाक पुत्र स्व. इस्तियाक निवासी चौक लखनऊ से हुई थी तथा आफाक का भाई नूर आलम मो. रफी सिद्दीकी के यहाँ ड्राइवर था।
इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि पकड़ शिवगढ़ रिसोर्ट मे रखी गई है, जिस पर क्षेत्राधिकारी चौक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वहाँ छापा मारकर अपहृत बालक साद को रिसोर्ट के कमरे से बरामद किया तथा उसी कमरे से दो महिलाओं रेहाना एवं सुल्ताना को हिरासत में लिया गया। एक अन्य अभियुक्त नूर आलम खिड़की से कूदकर भाग निकला।
रेहाना एवं सुल्ताना ने अपने बयान में बताया कि मो. साद के अपहरण की पूरी साजिश साद के पिता मो. फसी एवं उनके पति नूर आलम ने रची थी। सुल्ताना ने अपनी बहन को इस वारदात के लिए तैयार किया था।
पिता मो. फसी से पुलिस ने पूछताछ करने पर स्वीकार किया कि उसके घर में पैसे का सारा नियंत्रण उसके पिता मो. रफी सिद्दीकी के पास है तथा घर में अभी भारी मात्रा में धन आया है जो उसके अन्य भाई कारोबार के लिए पिता से माँग रहे थे जिससे मेरे हिस्से में बहुत कम धन आता अतः मो. फसी ने नूर आलम के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया।
पिता द्वारा अपने कारोबार के लिए धन लेने के लिए अपने ही पुत्र का अपहरण जैसा घिनौना कृत्य किया जो समाज के लिए शर्मनाक घटना है।
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