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सिख समुदाय का डेरा से तनाव बढ़ा
श्रीगंगानगर में सिख समुदाय और डेरा सच्चा सौदा अनुयायियों के बीच जारी तनातनी ने अब गंभीर रूप धारण कर लिया हैं।

जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों के 24 फरवरी को समानांतर मार्च में टकराव की आशंका को देखते हुए 25 फरवरी तक निषेधाज्ञा लागू कर दी हैं, लेकिन सिखों ने इसके बावजूद खालसा मार्च निकलाने की घोषणा कर दी हैं। वहीं डेरा के प्रतिनिधियों ने आज अपने रोष मार्च की अनुमति के लिए विधिवत तौर पर प्रशासन को आवेदन कर दिया और उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने सिखों के खालसा मार्च को नहीं रोका तो डेरा प्रेमी भी हर हालत में अपना रोष मार्च निकालेंगे।

दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद के लिहाज से गतिविधियाँ कल शाम से ही शुरू हो गई थी, जब जिला कलक्टर भवानीसिंह देथा ने धारा 144 के तहत आदेश जारी कर गंगानगर उपखंड क्षेत्र में बिना अनुमति के कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम या जुलूस इत्यादि आयोजित करने पर रोक लगा दी।

इस आदेश के बाद आज खालसा मार्च की आयोजक एक नूर खालसा फौज ने एक वक्तव्य में साफ तौर पर कह दिया कि खालसा मार्च सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है और यह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से होगा।

संगठन के संरक्षक और तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंतसिंह नंदगढ़ ने अपने बयान में जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए निषेधाज्ञा लागू करने के आदेशों को तुगलकी फरमान करार दिया और कहा कि इसे सिख समुदाय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।

उधर डेरा सच्चा सौदा के सिरसा मुख्यालय से आई कमेटी के सदस्य जिला कलक्टर से मिले और कहा कि डेरा प्रेमी अपने गुरु के खिलाफ दुष्प्रचार को सहन नहीं कर सकते और इसका हर सीमा तक जाकर विरोध करेंगे। डेरा के शिष्टमंडल ने इसके साथ पंजाब से आ रहे सिख नेताओं के गंगानगर जिले में प्रवेश पर रोक लगाने की माँग की और फिर 24 रोष मार्च की अनुमति के लिए उपखंड अधिकारी को प्रार्थना पत्र पेश कर दिया।
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