एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विनोद मेहता ने खोजी पत्रकारिता को शहरी चकाचौंध और सत्ता के गलियारे से निकालकर ग्रामीण इलाकों तक इसका दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है।
मेहता ने गुरुवार रात यहाँ आयोजित भारत एवं यूरोपीय संघ के संपादकों के सम्मेलन में 'खोजी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियाँ' पर चर्चा के दौरान कहा कि भारत समेत दुनिया के कई देशों की सत्ता में भूचाल ला देने वाली पत्रकारिता के इस स्वरूप के सामने कई परेशानियाँ हैं लेकिन उसे इससे निकलने का रास्ता निकालना होगा।
आउटलुक समूह के मुख्य संपादक मेहता ने कहा कि पत्रकारिता को शहरी क्षेत्रों अथवा सत्ता के गलियारे तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के ग्रामीण इलाकों में चलाई जाने वाली कई योजनाओं में खामियाँ हैं। खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन वितरण में तो जबरदस्त कमियाँ हैं। इस क्षेत्र में काम करके खोजी पत्रकारिता का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने भारत अथवा दुनिया के अन्य देशों में खोजी पत्रकारिता के मायने में फर्क मानने से इनकार करते हुए कहा कि हमारे यहाँ टेलीविजन के बनिस्बत प्रिंट मीडिया में इसका चलन ज्यादा है। इसकी वजह शायद यह है कि इसके लिए तथ्य जुटाने में अधिक समय लगता है।
इसके अलावा सूचनाओं की कमी के चलते भी खोजी पत्रकारिता की राह में बाधाएँ आती हैं। हमारे समाज की संरचना कुछ इस तरह की है कि लोग सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं करना चाहते। उन्होंने मीडिया में खोजी पत्रकारिता के प्रति घटते रुझान पर चिंता जताई।
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