राज्य ललित कला अकादमी उ.प्र. में लखनऊ (जन्म-फैजाबाद, कला शिक्षा-लखनऊ एवं बनारस) के कलाकार अवधेश मिश्र के नवीनतम चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन 21 से 24 फरवरी तक किया जा रहा है। इसका उद्घाटन बृहस्पतिवार 21 फरवरी को सायं 4 बजे सम्पन्न हुआ।
अवधेश मिश्र ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि के तत्वों, प्रकृति व बचपन में बिताए अपने अविस्मरणीय क्षणों को नए रूपों में अभिव्यक्त किया है। इन चित्रों में बच्चों के खिलौने, हवाई जहाज, अक्षरों के ब्लॉक, कागज की बनी फिरकी, कागज की नाव, खेतों में जानवरों से रक्षा के लिए लगाए गए 'ऊढ़' (जिसमें लकड़ी या बाँस के टुकड़ों में कपड़ा पहना दिया जाता है, सिर के लिए काली हँडिया लगा दी जाती है), उत्सवों में टंगे बंदनवार, सजे गमले, हवन कुंड, माँगलिक कार्यों में बनाए जाने वाली लोक कला के अभिप्राय - हाथी, कोहबर, आलेखन आदि, गर्म रातों में चंद्रमा की शीतलता का अनुभव करने वाले क्षणों, चंद्रमा के विभिन्न - गोल या चंद्राकार को अनेक रंग-संगतियों व प्रतीकात्मक आकारों के साथ अभिव्यक्त किया है।
ये चित्र जहाँ बचपन में एक बार फिर ले जाते हैं, वहीं इसमें बनाई गई फिरकी, जिसे समय चक्र का प्रतीक माना जा सकता है, समय कैसे इतिहास बनता जा रहा है, का संकेत देती है। चटकीले रंगों की संवेदनशील तानों और बोल्ड फार्म्स के माध्यम से संयोजित ये चित्र दर्शकों को एक नएपन का अनुभव प्रदान कर रहे हैं।
इस प्रदर्शनी में बड़े-बड़े आकार के (दो-तीन कैनवास जोड़कर) चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। सभी चित्र तैलरंग में 2007 और 2008 में बनाए गए हैं। यह प्रदर्शनी दर्शकों के अवलोकनार्थ 22 से 24 फरवरी तक दिन में 2 बजे से सायं 7 बजे तक खुली रहेगी।
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