अचानक एक बेशकीमती हीरा मिल जाने से रातों-रात किस्मत चमकने की उम्मीद लगाए एक गरीब मजदूर की 'लखपति' बनने की हसरत पूरी नहीं हो पा रही है।
मध्यप्रदेश के हीरा उत्पादक पन्ना जिले के गरीब मजदूर श्यामलाल लूनिया को लगभग छह माह पहले भूतियाउ की एक उथली खदान से 15.2 कैरेट का एक बड़ा हीरा मिल गया था। इसकी कीमत लाखों रुपए आँकी गई है। इसकी सरकारी नीलामी से मिलने वाली रकम का लगभग नब्बे फीसदी हिस्सा श्यामलाल को मिलने वाला है, जो अनुमानित तौर पर कम से कम 14 लाख रुपए होगी।
मगर मुश्किल यह है कि सही बोली नहीं लग पाने के कारण हीरा बिक ही नहीं पा रहा है और श्यामलाल के लखपति बनने का इंतजार लंबा खिंचता जा रहा है। देश भर के हीरा व्यापारियों की मौजूदगी में कल जिले की उथली खदानों से निकले 158 कैरेट वजन के 275 हीरों की नीलामी की गई, लेकिन श्यामलाल का हीरा कम बोली लगने के कारण एक बार फिर नहीं बेचा जा सका। बोली लगाने वालों ने इसकी अधिकतम कीमत प्रति कैरेट एक लाख पाँच हजार रुपए लगायी थी1
इससे पूर्व तीन माह पहले हुई एक और नीलामी में इसके लिए एक लाख 17 हजार रुपए प्रति कैरेट की बोली लगाई गई थी पर इसे बेचा नहीं गया। नीलामी के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए हीरा व्यापारियों के अलावा कौतूहलवश इसे देखने के लिए बड़ी संख्या आम लोग भी जुटे थे।
हीरा अधिकारी जे.के. सोलंकी ने बताया कि भारतीय हीरा आभूषणों के प्रमुख आयातक अमेरिका की मुद्रा डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती आ जाने के कारण ही फिलहाल इस हीरे के लिए सही बोली नहीं लग पा रही है। उन्होंने अनुमान लगाया कि आने वाले समय में हीरे को अच्छी कीमत पर बेचा जा सकेगा, जिससे श्यामलाल को काफी धन मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि हीरे की नीलामी से मिलने वाली कीमत में से 10 प्रतिशत रॉयल्टी और 2.24 प्रतिशत टीडीएस टैक्स काटने के बाद बाकी सारी राशि श्यामलाल को सौंप दी जाएगी।
बहरहाल 'लखपति' बनने के लिए श्यामलाल को कम से कम दो और माह तक इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि नियमों के अनुसार अब इस हीरे की अगली नीलामी अप्रैल माह में होगी।
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