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सीबीआई का गवाह बलात्कार का आरोपी
रामपुर तिराहा कांड में तत्कालीन कोतवाल मोतीसिंह के विरुद्ध पुलिस गोली के बाद उत्तराखंडियों के विरुद्ध फर्जी मुकदमे बनाने के मामले में सीबीआई द्वारा पेश किए गए एक गवाह पुलिस उपनिरीक्षक सतीश चन्द्र शर्मा ने विशेष सीबीआई अदालत में स्वीकार किया कि वह कांड के एक अन्य मामले में उत्तराखंडी महिलाओं के साथ बलात्कार किए जाने के मामले में आरोपी है तथा न्यायालय में उसके ‍‍‍विरुद्ध आरोप तय किए जा चुके हैं।

विशेष सीबीआई मजिस्ट्रेट पीयूष पांडे की अदालत में जिरह के दौरान यह बात उजागर हुई कि सीबीआई का यह गवाह कांड के एक अन्य मामले में बलात्कार का आरोपी है। बचाव पक्ष के वकील सुरेन्द्र शर्मा ने गवाह से जिरह कर यह साबित करने का प्रयास किया कि वह दोनों मामलों में घटनास्थल पर उपस्थित नहीं था।

उसने बताया कि घटना के समय वह अन्य कार्य से गया हुआ था। पुलिस दबाव में उसका नाम लिखा-पढ़ी में शामिल किया गया। उसने यह भी स्वीकार किया कि सीबीआई ने उसे इस मामले में जहाँ गवाह के रूप में पेश किया है वहीं कांड के एक अन्य मामले में वह बलात्कार के मामले में आरोपी है तथा उसके विरुद्ध आरोप तय हो चुके हैं।

अपने बयान अदालत में दर्ज कराते हुए बचाव पक्ष के वकील की जिरह में बताया कि वह घटना के दिन कोर्ट साक्ष्य में गया हुआ था। वह गत दो अक्टूबर को 11 बजे वापस लौटा तो रामपुर तिराहा कांड घटित हो चुका था तथा घटना के समय वह वहाँ उपस्थित नहीं था।

बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में यह मुद्दा उठाया कि एक तरफ तो सीबीआई उक्त उपनिरीक्षक को गवाह के रूप में पेश कर रही है वहीं दूसरी तरफ एक अन्य मामले में सीबीआई ने उसे घटनास्थल पर दर्शाकर आरोपी बताया है। सीबीआई की अपनी ही कार्यवाई में भिन्नता दिखाई दे रही है।

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने फर्जी मामले बनाने के मामले में सीबीआई ने सतीशचन्द्र उपपुलिस निरीक्षक के बयान कराए थे कि वह घटना के समय उपस्थित नहीं था फिर भी पुलिस ने फर्जी मामले दर्ज करने के लिए उसकी उपस्थिति दिखा दी।

बचाव पक्ष ने सीबीआई की कार्रवाई को भी गलत साबित करने का प्रयास इस आधार पर किया कि एक कांड के दो अलग-अलग मामलों में परस्पर विरोधी बातें सामने आ रही हैं। विशेष सीबीआई मजिस्ट्रेट ने गवाह से जिरह पूरी होने के बाद अगली सुनवाई के लिए आगामी 26 फरवरी नियुक्त कर दी है।

अदालत के इतिहास में ऐसे मामले कम ही आते हैं, जहाँ अभियोजन पक्ष (सीबीआई) अपने ही बुने जाल में स्वयं ही फँस रहा हो। उसने रामपुर तिराहा कांड के एक मामले में एक पुलिस दारोगा को घटना के समय अनुपस्थित बताया है और बलात्कार के एक मामले में उसे कांड में उपस्थित दिखाकर आरोपी बनाया है।

सीबीआई ने गत दो अक्टूबर 1994 को पुलिस फायरिंग के बाद उत्तराखंडियों पर फर्जी मामले दर्ज करने के आरोप में तत्कालीन कोतवाल मोतीसिंह के विरुद्ध धारा 182 भादसं के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया था। उसकी सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है।

गत दो अक्तूबर 1994 को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गए थे तथा महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 12 जनवरी, 1995 को कांड की सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे।

सीबीआई ने 72 गवाहों के आधार पर 28 पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध मामले दर्ज कर अदालत में दायर किए थे, इनमें आठ मामलों की यहाँ विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई चल रही है।
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