उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य विधानसभा में मुख्य प्रतिपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए उसकी पूर्ववर्ती सरकार को घोटालों की सरकार करार दिया जबकि घोटालों में सीबीआई जाँच की सिफारिश छात्र संघ चुनाव पर रोक प्रदेश में वैट लागू करने के अपनी सरकार के निर्णयों को उचित ठहराया।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर आए धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मायावती ने बसपा के महानायकों के नाम पर स्मारकों के निर्माण एवं मूर्तियों की स्थापना ही नहीं, बल्कि इटावा में प्रदर्शनकारी छात्रो पर हाल ही में हुई पुलिस फायरिंग का बचाव किया।
उन्होंने सपा सुप्रीमो और प्रतिपक्ष के नेता मुलायम सिह यादव को सीधे निशाने पर रखा और उनके जमाने में पुलिस और पीएसी की भर्तियों में हुई कथित अनियमितताओं एवं विधानसभा चुनाव में भाजपा से जारी बताई गई भड़काऊ सीडी मामले की जाँच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश को सही ठहराया।
उन्होंने कहा कि इन मामलों में चूँकि राजनीतिक दलों के बडे़ नेताओं का नाम सामने आ रहा था, इसलिए उनकी सरकार ने इन मामलों की जाँच सीबीआई को सौंपने की संस्तुति की ताकि उनकी सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप न लगे। उल्लेखनीय है कि मायावती के भाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष मुलायमसिंह यादव सदन मे उपस्थित नहीं थे जिस पर मायावती ने यह कहते हुए कटाक्ष भी किया कि नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति से लगता है कि उनके अन्दर मेरे जवाब का सामना करने की हिम्मत नहीं थी।
मायावती ने सदन में पूर्व में दिए नेता प्रतिपक्ष के भाषण में लगाये गए इन आरोपों को खारिज किया कि प्रदेश में आतंकवाद के नाम पर निर्दोष मुस्लिम मारे जा रहे हैं और प्रदेश आतंकवादियों की आरामगाह हो गया है।
उन्होंने अपनी सरकार द्वारा आतंकवाद निरोधक दस्ते के गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार के समय अनेक आतंकवादी पकडे गये और आतंकवाद की आड़ मे निर्दोष मुसलमानों को पकड़े जाने के आरोप गलत है और राजनीति से प्रेरित है।
मायावती ने विगत वर्षो में अयोध्या और वाराणसी में हुए आतंकवादी हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश बसपा के राज में नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी सरकार के राज में ही आतंकवादियों की आरामगाह बन गया था। इसके लिए उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली कथित लापरवाही को भी एक बड़ा कारण बताया।
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