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बद्रीनाथधाम के कपाट 9 मई को खुलेंगे
उत्तराखंड में हिमाचल पर्वत श्रृंखला के मध्य स्थित भगवान विष्णु के दरबार पवित्र बद्रीनाथ धाम के कपाट आगामी नौ मई को खोले जाएँगे।

नरेन्द्रनगर राजमहल में आज वसतपंचमी पर परम्परागत रुप से आयोजित बैठक में धर्माधिकारी जगदम्बा प्रसाद सती ने कपाट खुलने की तारीख की घोषणा की। बद्रीनाथ धाम के कपाट बर्फ के कारण गत वर्ष नम्बर में बन्द कर दिये गए थे।

बद्रीनाथ मंदिर समुद्र से 3133 मीटर की ऊँचाई पर नर और नारायण पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा है। इसी के पास बहती है अलकनन्दा नदी। कहा जाता है कि जब गंगा देवी मानव जाति के दु:खों को हरने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई तो पृथ्वी उसका प्रबल वेग सहन नहीं कर सकी, इसलिए गंगा की धारा को बारह जल मार्गो में विभक्त किया गया। उनमें से एक है अलकनन्दा।

यही स्थल भगवान विष्णु के निवास स्थान के गौरव से शोभित है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में यह स्थल बदरियों (जंगली बेरों) से भरा रहता था, इसलिए इसको बद्रीबन भी कहा जाता था।

इस धाम की पवित्रता के बारे में धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि स्वर्ग धरती और पाताल में कई तीर्थ स्थल है लेकिन बद्रीनाथ जैसा अन्य कोई नहीं है।

बद्रीनाथ धाम में वर्तमान मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में आदि गुर शंकराचार्य द्वारा किया गया था। उन्होंने एक मठ की स्थापना भी की थी1

विशाल बद्री के नाम से विख्यात यह मंदिर मई में खुलता है और नवम्बर तक दर्शनों के लिए खुला रहता है। देश विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ श्रद्धासुमन अर्पित करने आते है।
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