जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे का कारगिल युद्ध के बाद शांति का संदेश लेकर पाकिस्तान जाने का सपना उनके आखिरी साँस लेने के साथ ही अधूरा रह गया। पाकिस्तानी लोगों के लिए शांति का संदेश लेकर बाबा ने वाघा बार्डर पार करने की योजना बनाई थी, लेकिन वीजा के लिए उनका आवेदन दो दफा रद्द कर दिया गया। वह शांति और सद्भावना का संदेश पूरी दुनिया में पहुँचना चाहते थे, लेकिन उन्हें क्रानिक स्पाइन समस्या थी। टाटा मोटर्स ने उनकी सद्भावना यात्रा के लिए उन्हें एम्बुलेंस की तरह का एक वाहन देने की पेशकश भी की, लेकिन कमजोरी और बीमारी की वजह से वह अपना सपना पूरा नहीं कर सके।
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