ससुर द्वारा अपनी पुत्रवधू के साथ बलात्कार के चर्चित मामले की पीड़ित इमराना ने एक और कानूनी लड़ाई जीत ली, जब यहाँ की एक स्थानीय अदालत ने उसकी जेठानी द्वारा उसके खिलाफ दायर मानहानि का मामला खारिज कर दिया।
स्थानीय अदालत की जज शाइस्ता आकिल ने इमराना के विरुद्ध दायर मानहानि मुकदमे को साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया। इमराना की जेठानी तथा आरोपी ससुर अली मोहम्मद की दूसरी पुत्रवधू मुनाजरा बेगम ने दो वर्ष पूर्व इस आधार पर दावा अदालत में दायर किया था कि इमराना ने अपने बयान में कहा था कि उसके आरोपी ससुर अली मोहम्मद ने इमराना सहित घर की सभी पुत्रवधुओं के साथ बलात्कार किया।
मुनाजरा का कहना था कि इस बयान से परिवार की सामाजिक इज्जत खराब हुई है तथा भविष्य में घर की लड़कियों के शादी ब्याह में कठिनाई आएगी।
अदालत ने वादी मुनाजरा बेगम द्वारा मामले में पैरवी न करने के कारण साक्ष्य के अभाव में से एक पक्षीय खारिज कर दिया है। इमराना पर यदि यह आरोप सिद्ध हो जाता तो उसे इस मामले में दो वर्ष की सजा हो सकती थी। इससे पूर्व इमराना के वकील सीताराम वर्मा ने अदालत में कहा कि वादी मामले में आरोप सिद्ध करने में वादी असफल रहा है तथा मामले को चलाने में रुचि नहीं ले रही है। इस कारण इमराना के विरुद्ध दायर मामला धारा 203 के तहत रद्द होने योग्य है। इस प्रकार बलात्कार की पीड़ित इमराना ने अपनी ससुराल से एक और कानूनी लड़ाई जीत ली है। इमराना बलात्कार मामले में जिला सत्र अदालत गत 19 अक्टूबर, 2006 को आरोपी ससुर अली मोहम्मद को दोषी करार देकर दस वर्ष की सजा पहले ही सुना चुकी है तथा बलात्कारी ससुर केन्द्रीय कारागार में अपनी सजा काट रहा है।
गत 16 जून, 2005 को इमराना के ससुर अली मोहम्मद को पुलिस ने गिरफ्तार किया था तथी से वह जेल में है। इमराना बलात्कार का मामला इस समय सुर्खियों में आ गया था जब एक पंचायत ने फतवा दिया था कि घटना के बाद इमराना का पति नूर इलाही उसके बेटे के बराबर बन गया है। इसलिए इमराना का उसके पास रहना हराम है।
ज्ञात रहे कि इमराना अब अपने मायके ग्राम कूकड़ा में अपने पति के पास रह रही है। रहने के लिए एक सामाजिक संगठन ने उसे प्लाट भी उपलब्ध कराया था।
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