इस्पात मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्र के इस्पात निर्माताओं की समीक्षा बैठक 15 फरवरी को बुलाई है, जहाँ इस बात पर गौर किया जाएगा कि इस्पात की कीमत में हाल में की गई वृद्धि जरूरी और उपयुक्त है।
पासवान ने कहा कि इस्पात की कीमतों में वृद्धि चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सेल और आरआईएनएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा कीमतों में कटौती का कोई प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि बाजार के 75 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण निजी क्षेत्र की कंपनियों का है।
पासवान ने कहा कि लागत मूल्य में वृद्धि मुख्यतया लौह अयस्क और कोकिंग कोल की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनियों ने इस्पात की कीमतों में वृद्धि की है।
पासवान ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2011-12 के लिए इस्पात उत्पादन लक्ष्य को 6.5 करोड़ टन से संशोधित कर 8.5 करोड़ टन किया है, जबकि अंतर मंत्रालय समूह ने इसे 10 करोड़ टन निर्धारित किया है।
मंत्री ने कहा कि भारत अभी विश्व में इस्पात का पाँचवाँ सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उसे वर्ष 2015 तक दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 तक भारत का इस्पात उत्पादन 20 करोड़ टन होने का लक्ष्य रखा गया है। पासवान ने कहा कि कोकिंग कोल की आपूर्ति अभाव की समस्या से निपटा जाए तथा भारतीय कंपनियों को विदेशों में संयुक्त उपक्रम स्थापित करने पर ध्यान देना चाहिए।
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