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मौनी अमावस्या पर लाखों ने लगाई डुबकी
मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर गुरूवार को यहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। हर साल मकर संक्राति से शुरू होकर एक महीने तक संगम की रेती पर चलने वाले माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर किया जाने वाला स्नान प्रमुख माना जाता है।

सूत्रों ने बताया कि संगम के तट पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया। मौनी अमावस्या के दौरान भारी भीड़ उमड़ने के मद्देनजर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

विद्वानों के अनुसार चंद्र पंचाग के अनुसार पड़ने वाले मौनी अमावस्या के स्नान का माघ माह में महत्वपूर्ण स्थान होता है। यह पर्व यदि सोमवार को पड़ता है तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि इस मौके पर गंगा और यमुना के तटों पर बसे तमाम पवित्र स्थलों जैसे हरिद्वार, वाराणसी और कुरूक्षेत्र में स्नान के लिए श्रद्धालु एकत्र होते हैं, लेकिन सबसे अधिक श्रद्धालु संगम के तट पर प्रयाग के पुण्य सलिला संगम पर आते हैं। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि सारे देवी-देवता माघ के महीने में प्रयाग में प्रवास करते हैं।

गौरतलब है कि आज सूर्यग्रहण भी है। हालाँकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया लेकिन कुछ ज्योतिषविदों का मानना है कि ग्रहण दिखे या न दिखे लेकिन इसका बुरा प्रभाव अवश्य पड़ता है। शायद इसी वजह से मौनी अमावस्या पर अपेक्षा से कहीं अधिक श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
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