जम्मू-कश्मीर के मादक द्रव्य तस्कर को मुंबई की एक अदालत ने गुरुवार को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने उसे दूसरी बार मादक द्रव्य की तस्करी करने का दोषी करार दिया था।
गुलाम मोहम्मद मलिक को गुजरात की एक अदालत ने मादक द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा जनवरी 2002 में अहमदाबाद में 142 किलोग्राम हशीश की बरामदगी के सिलसिले में दोषी करार दिया था। जब्त किए गए इस मादक द्रव्य में 55 किलोग्राम की आपूर्ति उसे की जानी थी।
मुंबई एनसीबी अधिकारियों ने 14 जनवरी 2002 को डोंगरी उपनगर स्थित मलिक के आवास से एक किलो आठ सौ ग्राम हशीश बरामद की थी।
मलिक ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने अंधेरी उपनगर स्थित गुरुदेवसिंह वोहरा के गोदाम में और हशीश रखा है। इसके बाद हुई छापामारी में 188 किलोग्राम हशीश की बरामदगी हुई। इस तरह वह मादक द्रव्य की तस्करी के एक और मामले में फँस गया।
एनसीबी को दिए बयान में मलिक ने कहा कि वह 1994 से बेरोजगार था और उसने 1999 में हशीश की तस्करी शुरू की। वह कश्मीर से हशीश खरीदकर यहाँ बेचता था।
मलिक को पहली बार मार्च 2004 में गुजरात के हिम्मतनगर की फास्ट ट्रैक अदालत ने दोषी करार देकर दस साल की सजा सुनाई थी। फिर पिछले साल 18 दिसंबर को विशेष न्यायाधीश पीबी सावंत ने उसे मुंबई मामले में दोषी पाया था।
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