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खेलने की उम्र में बनाई एड्स पर फिल्म
एड्स भले ही बच्चों का विषय नहीं है, लेकिन कुछ छात्रों ने मिलकर यहाँ पर एचआईवी/एड्स पर एक वृत्तचित्र बना दिया है। जिसने भी फिल्म देखी वह प्रशंसा करने से खुद को नहीं रोक सका। यहाँ के रयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने यह बनाई है।

फिल्म का नाम है 'छोटी सी आशा'। इसमें कोई पेशेवर कलाकार, तकनीशियन, पटकथा लेखक आदि नहीं है। हर व्यक्ति ने लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से कार्य किया है। फिल्म को पूरी करने के लिए इन छात्रों ने अवकाश में भी कार्य किया। फिल्म पूरी होने में करीब चार माह का समय लगा।

जो छात्र फिल्म निर्देशक है, उसका कहना है कि यह एचआईवी/ एड्स के बारे में लोगों से अपील करेगी कि जानकारी होने पर इससे बचा जा सकता है। कैमरामेन का काम करने वाले करणबीर सिंह का कहना है कि इस फिल्म से यह सीखा जा सकता है कि छूने से एड्स नहीं होता, छूने से केवल प्यार फैलता है। इसलिए एड्स पीडि़त को छू लेने से संक्रमण नहीं फैलता।

ये है कहानी : यह फिल्म एक छोटी ल़ड़की की कहानी है, जो एड्स पीडित है। उसके माता-पिता इसी बीमारी से मरे थे। उसकी चाची उस लड़की को अपना लेती है, परंतु उसका पति उसका विरोध करता है। वह उसे विद्यालय में भर्ती कराती है। उसकी चाची की मदद से वह बीमारी से लड़ती है।

दिल्ली के एक एनजीओ ने इस फिल्म में तकनीकी सहयोग दिया है। न केवल स्कूली बच्चों ने वरन्‌ कुछ माता-पिताओं ने भी फिल्म में काम किया है। रयान फाउंडेशन का कहना है कि हम प्रत्येक व्यक्ति को एड्स से बचाना चाहते हैं और उसके लिए जागरूकता लाना बेहद जरूरी है।

स्कूल ने पंजाब स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा है कि राज्य में एड्स के प्रति जागरूकता लाने के लिए यह फिल्म सभी को दिखाई जाए। सारे छात्र, उनके शिक्षक और माता-पिता इस बात से खुश हैं कि उनके प्रयासों को सराहना मिली है।
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