उत्तर भारत में चुभन भरी तीखी ठंड के चलते पश्चिमी उत्तरप्रदेश के दुधारू पशुओं का दूध सूख गया है। रक्तचाप प्रभावित होने से पशुओं के दूध उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। अकेले मुजफ्फरनगर जिले के करीब छह लाख दुधारू पशुओं का दूध 20 से 25 प्रतिशत कम होने की सूचना मिली है।
जिला मुख्यालय पर मिली सूचना के अनुसार पश्चिमी उत्तरप्रदेश में दूध उत्पादन में अग्रणी मुजफ्फरनगर मेरठ सहारनपुर बागपत आदि जिलों में सहकारी दूध समितियों के माध्यम से दूध जमा किया जाता है।
कई स्थानों में डेरियों पर दूध की कमी देखी जा रही है। अकेले मुजफ्फरनगर जिले में करीब छह लाख दुधारू पशु हैं। पशु विभाग के सूत्रों के अनुसार अधिक ठंड के कारण दुधारू पशुओं का रक्तचाप प्रभावित हुआ है। इसका सीधा प्रभाव उनके दूध उत्पादन पर पड़ा है।
कड़ाके की इंड का सबसे ज्यादा असर गउु नस्ल पर पड़ता है। पशुओं को निमोनिया का खतरा बना हुआ है। यदि शीत लहर जारी रहती है तो दूध का उत्पादन गिरने की आशंका बढ़ गई है।
शीत लहर के चलते पोष्टिक चारा पशुओं को नहीं मिल पा रहा है। वहीं कड़ाके की ठंड से पशु चारा लेना कम कर देता है जिसका उसके रक्तचाप पर प्रभाव पड़ता है। इसी कारण दुधारू पशुओं के शरीर में दूध का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को दूध उत्पादन घटने से रोकने के लिए ताजा और हरा चारा पशुओं को देने की सलाह दी है। वहीं दुधारू पशुओं को सूरज की धूप में बिठाना भी लाभदायक बताया है।
इस बीच आज पश्चिमी उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर व उसके आसपास के जिलों में भारी कोहरा पड़ने से अंधेरा छाया रहा तथा राजमार्गों पर यातायात धीमी गति से चला। दिल्ली देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग, खटीमा पानीपत राजमार्ग, व पोड़ी दिल्ली हाइवे पर सन्नाटा रहा। कुहरे के कारण ठंड का प्रकोप बढ़ गया है।
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