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दुनिया की पहली 'चाँद घड़ी' लंदन में
लंदन की टेम्स नदी कभी प्रदूषण के लिए जानी जाती थी और अब जबकि वह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हो चुकी है तो दुनिया की पहली 'चांद घड़ी' उसकी पहचान बनने जा रही है जो उसके मुहाने पर लगाई जाएगी।

लंदन की एक प्रदर्शनी में हाल ही में दुनिया की पहली ज्वार संचालित ल्यूनर घड़ी का नमूना प्रदर्शित किया गया। यह घड़ी इस धरती पर पहचानी जाने वाली वस्तुओं में एक होगी। ऊर्जा से चलने वाला पहला सार्वजनिक कलात्मक नमूना होगी।

अलूना परियोजना के नाम से चर्चित इस अनूठी घड़ी के पीछे 40 मीटर चौड़ा एक ऐसा ढांचा बनाने का प्रस्ताव है जिसे लंदन स्थित टेम्स नदी के नीचे लगे टर्बाइनों से संचालित किया जाएगा। ये टर्बाइन सैकड़ों घरों के लिए बिजली उत्पादन का भी काम करेंगे।

काँच और स्टील से बनाया जाने वाला यह ढाँचा तीन वृत्तों से मिलकर बना होगा और उसे इस तरह डिजाइन किया जायेगा कि चांद के बढने और घटने के हिसाब से इसमें प्रकाश हो सके। जब चाँद पूरा होगा तो ज्वार अपने चरम पर होगा और घड़ी सबसे तेज चमकेगी।

इस अनूठी घड़ी को स्थापित करने के लिए ली नदी के मुहाने पर टेम्स के करीब एक जगह भी खोज ली गई है। इस परियोजना के प्रमुख कलाकार लौरा विलियम्स के मुताबिक यह परियोजना के लिए एक दिलचस्प स्थल है। यह घड़ी समय और धरती की हमारी समझ को बदल देगी।

वास्तव में इस अलूना परियोजना के पीछे लंदन के डिप्टी मेयर निक्की गावरान का दिमाग है। इसमें लंदन के प्रमुख कलाकारों, वैज्ञानिकों और विशिष्ट व्यक्तियों का योगदान होगा।

डिप्टी मेयर गावरान का कहना है कि एक बार आप इस परियोजना की व्यापकता को देखेंगे तो समझ जाएँगे कि यह कितनी शक्तिशाली और प्रतीकात्मक है।

ब्रिटिश समीक्षा पत्रिका के अनुसार इस परियोजना का अभी शुरुआती काम चल रहा है और इसे वित्तीय मदद की जरूरत है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस मुनाफारहित परियोजना की कीमत करीबन पाँच लाख पाउंड आएगी और इसके निर्माण में पाँच मिलियन पाउंड लग जाएँगे।

इसे 2012 के लंदन ओलिम्पिक खेलों से पहले वर्ष 2011 में ही पूरा कर लिए जाने की योजना है। परियोजना प्रमुख विलियम्स मानते हैं कि यह विशालकाय संरचना काफी टिकाऊ है क्योंकि यह पुनर्चक्रित काँच से बनाई जाएगी और टेम्स के ज्वार भाटे इसे ऊर्जा मुहैया कराएँगे।

वास्तव में यह अपने तरह की अद्भुत परियोजना होगी। एक बार शुरू हो जाने के बाद 200 घरों में बिजली लाने के लिए यह नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन कर अपना खर्च निकाल लेगी।
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