मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > प्रादेशिक
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
'थिन आइस' सर्वश्रेष्ठ जनजातीय फिल्म
आधुनिकीकरण के इस तेज रफ्तार दौर में पीछे छूटते जा रहे जनजातीय सरोकारों को थामने के संकल्प के साथ इंदौर में रविवार को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 'इफटैक-2008' समाप्त हो गया।

जनजातीय कला संस्कृति पर दुनिया के पहले फिल्म महोत्सव में चालीस देशों के नामचीन फिल्मकारों की कारीगरी परदे पर उतरी और दर्शकों को जनजातीय कला संस्कृति में रची-बसी कुल 69 फिल्मों से रुबरु होने का मौका मिला। इन्हें पाँच श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया।

सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फिल्म का पुरस्कार स्वीडन की 'थिन आइस' को दिया गया। हेकन बर्थास द्वारा निर्देशित फिल्म थिन आइस लद्दाख के सुदूर अंचलों में महिला सशक्तिकरण के मुद्‍दे की ओर ध्यान खींचती है।

विजया प्रताप के निर्देशन में बनी भारतीय फिल्म 'इतिकेला पांडुगा' (ट्राइबल फर्टिलिटी राइट्‍स) फिल्म समारोह की सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय फिल्म घोषित किया गया। आधे घंटे इस वृत्तचित्र में आंध्रप्रदेश के पूर्वी घाटों में बसी जनजातियों की ठेठ मान्यताओं और अनुष्ठानों को करीने से सँजोया गया है।

जनजातीय फिल्मकारों द्वारा बनाई गई बेहतरीन फिल्म का पुरस्कार जार्जिया की फिल्म 'रवानी' को दिया गया। इसे जोसेब सोसो ने निर्देशित किया है और यह जार्जिया की प्राचीनतम जनजातीय संस्कृति की झलक दिखाती है।

मध्यप्रदेश की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब 'ओ लोहगुंडी राजा हो' को मिला जिसे रवि विलियम्स ने निर्देशित किया है। यह फिल्म प्रदेश की अगड़िया जनजाति की समस्याओं से रूबरू कराती है।

विद्‍यार्थी द्वारा निर्देशित बेहतरीन फिल्म की श्रेणी में भारतीय फिल्म 'प्लीज डोंट डिस्टर्ब अस' ने बाजी मारी। स्पेशल ज्यूरी अवार्ड गया 'टालेस्ट स्टोरी कॉम्पिटीशन' के खाते में। कोई तीस मिनट की इस एनिमेशन फिल्म को लेजली मैकंजी और तारा डगलस ने मिलकर निर्देशित किया है। इसमें भारत के अलग-अलग भागों में बसी जनजातियों की कहानियों को बेहद मनोरंजक तरीके से पेश किया गया है।

फिल्म महोत्सव का आयोजन मध्यप्रदेश शासन के उपक्रम 'वन्या' और मुंबई के एक प्रोडक्शन हाउस द्वारा मिलकर किया गया। महोत्सव के दौरान मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी कलाकारों का हौसला बढ़ाने के लिए शुरू किया गया पहला जूनागढ़ पुरस्कार युवा चित्रकार दिलीप श्याम को दिया गया।

निर्णायक मंडल में मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक रमेश तलवार, पटकथा लेखक सलीम खान, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष व साप्ताहिक 'आउटलुक' के संपादक आलोक मेहता, सत्यजीत रे फिल्म संस्थान (कोलकाता) के निर्देशक एस. मलिक राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय के निर्देशक केएस शशिकिरण और दूरदर्शन के वरिष्ठ निर्देशक राजशेखर व्यास शामिल थे।
वीडियो देखें
और भी
फिल्म निर्माता पर यौन शोषण का आरोप
पूर्वी दिल्ली में आग, पाँच की मौत
चार आतंकियों को डुबोकर मारा
डेरा प्रमुख पर हमले के पीछे केसीएफ!
बदनाम गलियों की बहादुर बेटियाँ
नक्सलियों के शहरी नेटवर्क का खुलासा