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दवा खरीद में एक अरब का घोटाला
मप्र में नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी का आरोप
शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुनादेवी ने प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीद में सौ करोड़ रु. के घोटाले का आरोप लगाया है।

एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने दवाओं के सेम्पल व कुछ कागजातों के साथ दावा किया कि इस घोटाले में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई की मुख्य भूमिका है।

इस मामले की शिकायत वे लोकायुक्त से करने जा रही हैं। उधर विश्नोई ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को मनगढ़ंत एवं असत्य बताते हुए कहा कि जमुनादेवी राज्यपाल का पद न मिलने से बौखला रही हैं। इसी हताशा में वे सरकार पर ऊल-जुलूल आरोप मढ़ रही हैं। उन्हें इस संबंध में माफी माँगना चाहिए, अन्यथा वे मानहानि का दावा करेंगे।

आरो
*स्वास्थ्य विभाग इस वर्ष 170 करो़ड़ रु. की दवा खरीद रहा है जो एमआरपी से 50 फीसदी अधिक पर की गई है।

*इसमें मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री सीधे कमीशन ले रहे हैं।

*ब्रुफेन की 400 एमजी की दस गोली बाजार में 6 रुपए की है। यही गोली 30.61 रु. में खरीदी।

*भोपाल के जेपी अस्पताल में लोकल परचेस में दवाएँ एमआरपी से 17 फीसदी कम पर सप्लाई की जा रही हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग इन्हें 50 फीसदी अधिक पर खरीद रहा है।

*मुख्यमंत्री ने अपने सचिव एसके मिश्रा को लघु उद्योग निगम का एमडी बना रखा है। वे बड़े पैमाने पर घोटाला कर रहे हैं। खुद स्वास्थ्य आयुक्त की नोटशीट में है कि 12.50 करोड़ की दवाएँ बिना मंजूरी के खरीदी गई हैं।

*घोटाले में सीएम और मंत्री की भागीदारी इसी बात से प्रमाणित होती है कि ईमानदार छवि के आईएएस बीआर नायडू को स्वास्थ्य आयुक्त का चार्ज नहीं लेने दिया गया।

जवा
*दवाएँ दवा नीति के तहत ही खरीदी जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष ने दस गोलियों के रेट की लघु उद्योग निगम के सौ गोलियों के रेट से तुलना कर दी है।

*400 एमजी की ब्रुफेन की 10 गोलियाँ, जिनकी कीमत 6 रुपए है, उन्हें लघु उद्योग निगम से 30.61 रु. में खरीदा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इतनी कीमत (30.61 रु.) में 100 गोलियाँ खरीदी हैं न कि दस गोलियाँ।

*दवा नीति के तहत स्वीकृत दवाओं के स्वीकृत दर पर लघु उद्योग निगम के आदेश जारी करने तथा उनका भुगतान करने का अधिकार संचालक उपार्जन को है, जिसके तहत ही दवाओं की खरीदी की गई है।

*200 एमजी की दस गोलियों की खरीदी का मूल्य 17 रुपए 75 पैसे बताया है तथा उसका बाजार मूल्य वे 3.47 रु. बता रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इतनी ही राशि में 100 गोलियाँ खरीदी हैं न कि 10 गोलियाँ।
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