पगड़ी के कारण बेटे को स्कूल से निकालने का दुःख गुरदयालसिंह और उनकी पत्नी सुरजीत कौर को इतना ज्यादा हुआ कि उन्होंने इससे लड़ने के लिए अपने खुद के स्कूल की योजना बना ली।
बात चार साल पहले की है। गुरदयाल अपनी पत्नी सुरजीत और 14 साल के बेटे के साथ पेरिस के पास बोबिग्नी में रहते आए हैं। बेटा लुईस मिशन स्कूल में प़ढ़ता था। इसके बाद से ही सिख समुदाय वहाँ स्कूलों में पगड़ी से प्रतिबंध हटाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। ये सभी एक संगठन बना चुके हैं, जिसे युनाइटेड सिख कहा जाता है और इस मुद्दे पर वे लोगों की राय ले रहे हैं।
दरअसल गुरदयाल यहाँ के निर्माण व्यवसाय का बड़ा नाम है। इस समस्या का हल ढूँढने के लिए उन्होंने स्कूल के निर्माण का विकल्प निकाला। इसके तहत वे शेरे पंजाब कॉम्प्लेक्स तैयार कर रहे हैं। यह बोबिग्नी में ही बन रहा है और पूरी तरह से शैक्षिक परिसर की तरह कार्य करेगा। उन्हें अपने बच्चे को दूसरे सरकारी स्कूल में भर्ती कराने में काफी परेशानी आई। इसलिए उन्होंने उसे एक निजी स्कूल में दाखिल कराया।
काफी समय से अनुमति नहीं मिलने से परेशान यह दंपति फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी से मिलने की चाह में नई दिल्ली आ पहुँचा। सरकोजी राजकीय अतिथि के रूप में गणतंत्र समारोह में भाग लेने आए थे।
सिंह कहते हैं कि कौन बात करेगा, जब हमारे यहाँ नेता सुनने को तैयार नहीं है। फ्रांस में जो भी हो रहा है आगे से दूसरे देशों में भी होगा और जहाँ तक पगड़ी की बात है तो वह हमारे धर्म की पहचान के रूप में आवश्यक है। उनकी पत्नी कहती है कि पिछले 28 सालों में हमें कोई समस्या नहीं आई। अभी ही यह संकट आया है।
बोबिग्नी में सिखों की आबादी 1000 के करीब है और स्कूल जाने वाले बच्चे 250। इस संबंध में दिल्ली में सिख नेताओं ने ज्ञापन सरकोजी को भी दिया है। वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह इसमें हस्तक्षेप करें। नईदुनिया
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