उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनावों के दौरान हंगामा खड़ा कर देने वाली भाजपा की विवादित सीडी मामले में मुख्यमंत्री मायावती ने सीबीआई से जाँच कराने की सिफारिश की है। दूसरी ओर भाजपा ने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई निरूपित किया है।
उल्लेखनीय है कि विवादित सीडी प्रकरण पर राजधानी पुलिस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह व पूर्व मंत्री लालजी टंडन समेत दस नामजद लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र तैयार कर लिया है, जिसमें दावा किया गया है कि आरोप बखूबी प्रमाणित हैं। हालाँकि आरोप-पत्र अभी अदालत में दाखिल नही किया गया है। इसके लिए अभियोजन की अनुमति ली जानी है। यह विवादित सीडी विधानसभा चुनाव प्रक्रिया से पहले ही भाजपा द्वारा रिलीज की गई थी। सीडी लेकर काफी विवाद हुआ था। सीडी को लेकर अल्पसंख्यको ने आरोप लगाया था कि यह उन्माद भड़काने वाली है। इस मामले में हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह, विधायक लालजी टंडन, चौधरी वीरेन्द्रसिंह पँवार, श्रीमती अल्पना तलवार, प्रवेश गूजर, लालबहादुर, उदित, लोकेश, श्रीमती सुनीता व केसी अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
राजनाथ का इस्तीफा नहीं : भाजपा विधानमंडल दल के नेता ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि पुलिस द्वारा मात्र आरोप-पत्र तैयार कर देने मात्र से राजनाथसिंह के इस्तीफे का सवाल नहीं।
सिंह ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम पुलिस की विवेचना में कैसे आया? उन्होंने कहा कि राजनाथसिंह न तो प्रदेश अध्यक्ष हैं न ही विवादित सीडी रिलीज होने के दिन वे लखनऊ में थे फिर उनका नाम इस प्रकरण में पुलिस ने कैसे घसीटा।
भाजपा नेता ने कहा कि यह प्रकरण राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले पर चुनाव आयोग ने कोई कार्यवाही नही की फिर एकाएक यह प्रकरण कैसे पुलिस ने मीडिया को लीक कर दिया।
बदले की भावना : भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमें इससे कुछ लेना-देना नहीं है। हमने चुनाव आयोग के निर्देश पर सार्वजनिक तौर से इसकी भर्त्सना कर दी थी और यह मामला वहीं खत्म हो गया था। प्रसाद ने कहा कि मायावती सिंह के साथ बदला निकालना चाहती हैं।
|