करोड़ों रुपए के के फर्जी स्टांप पेपर घोटाले के मुख्य कर्ताधर्ता अब्दुल करीम तेलगी को बुधवार को विशेष अदालत ने यहाँ दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
विशेष न्यायाधीश एन. वेलु ने तेलगी को तीन करोड़ रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई है। जुर्माना न देने की स्थिति में उसे और तीन साल सश्रम कारावास की सजा काटनी पड़ेगी।
तेलगी को पुणे की एक अदालत ने फर्जी स्टांप पेपर घोटाले के सिलसिले में 13 साल सश्रम कारावास की सजा पहले ही सुना रखी है। न्यायाधीश वेलु ने कहा कि यह सजा और आज सुनाई गई सजा साथ साथ चलेंगी।
तेलगी और चार अन्य अभियुक्तों अब्दुल वाहिद बालाजी और जेकब चाको को अदालत ने दोषी ठहराया। वाहिद बालाजी और चाको को पाँच साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
एक अन्य दोषी पीटर कैनेडी को तीन साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायाधीश ने वाहिद पर तीन लाख रुपए का जुर्माना किया, जिसका भुगतान न करने पर उसे 18 माह और सश्रम कारावास काटना होगा।
कैनेडी पर अदालत ने 25 हजार रुपए का जुर्माना किया जिसे न देने पर उसे साढ़े सात माह और सश्रम कारावास की सजा काटनी होगी। तेलगी वाहिद और चाको पुणे की यरवदा जेल में बंद हैं। न्यायाधीश ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन लोगों को सजा सुनाई।
बालाजी को इस मामले में जमानत मिल चुकी है, लेकिन ऐसे ही एक अन्य मामले के सिलसिले में वह बेंगलुरू की जेल में बंद है। उसे अदालत में पेश किया गया था। कैनेडी को भी जमानत मिल चुकी है। वह सजा सुनाए जाते समय अदालत में मौजूद था।
न्यायाधीश ने कहा कि पाँचों अभियुक्त सजा की अवधि पहले ही पूरी कर चुके हैं अत: इन्हें छोड़ दिया जाएगा। इन सभी अभियुक्तों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।
इस मामले के अन्य आरोपी संदिग्ध डीआईजी मोहम्मद अली तत्कालीन सहायक आयुक्त शंकर निजामुद्दीन उसकी पत्नी नाजनीन और एलआईसी एजेंट रामस्वामी अदालत में मौजूद थे। अगली सुनवाई 15 फरवरी को नियत की गई है।
पूर्व में न्यायाधीश ने एक अन्य आरोपी सरफराज नवाज को दोषी ठहराया और पाँच साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
सीबीआई के अनुसार अभियुक्तों ने राज्य में फर्जी स्टांप पेपर बनाने का षड्यंत्र रचा। इनकी छपाई की और वितरित किए जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। आरोपियों पर धोखाधड़ी, षड्यंत्र रचने जालसाजी करने के आरोप लगाए गए थे।
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