एक वरिष्ठ रक्षा वैज्ञानिक ने मंगलवार को बताया कि सेना की तीसरी पीढ़ी की टैंक रोधी मिसाइल नाग परियोजना पूरे होने के कगार पर है तथा इसे सेना में शामिल किए जाने को मंजूरी देने से पहले इसका एक बार और परीक्षण किया जाएगा।
डीआरडीओ के मुख्य नियंत्रक अनुसंधान एवं विकास (प्रक्षेपास्त्र एवं रणनीतिक प्रणाली) डॉ. वी के सारस्वत ने यहाँ संवाददाताओं से कहा कि सेना नाग मिसाइल से खुश है। प्रयोगकर्ता परीक्षण का पहला दौर नवंबर और दिसंबर 2007 में पूरा हो गया तथा इस परियोजना का अंतिम परीक्षण इस साल गर्मियों में होगा।
नाग परियोजना की शुरुआत 1988 में की गई थी और इसका पहला परीक्षण नवंबर 1990 में हुआ था। यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकसित की जाने वाली पाँच प्रक्षेपास्त्र प्रणालियों में से एक है।
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