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विश्वनाथ मंदिर प्रांगण का भव्य विस्तार
विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण को भव्यता प्रदान करते हुए इस वर्ष जून तक इसे वर्तमान आकार का तिगुना विस्तार दे दिया जाएगा।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष एवं वाराणसी के मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए बताया कि प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का विस्तार कार्य बङे पैमाने पर किया जा रहा है और प्राचीन मंदिर की वास्तु कला के अनुरूप नए परिसर का निर्माण कार्य तेजी से पूर्ण हो रहा है।

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर का विस्तार कर वर्तमान लगभग ढाई हजार वर्ग फुट के क्षेत्रफल को साढ़े आठ हजार वर्ग फुट तक विस्तृत किया जा रहा है।

गोकर्ण ने बताया कि भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधाओं को ध्यान में रख कर ही मंदिर न्यास ने पिछले वर्ष अपनी बैठक में इसके परिसर के यथा संभव विस्तार का फैसला किया था।

उसी के तहत न्यास ने मंदिर के बगल में स्थित ताङकेश्वर मंदिर एवं रानी भवानी भुवनेश्वर मंदिरों के परिसरों को काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में समाहित करने का काम प्रारंभ किया।

उन्होंने बताया कि इन दोनों प्राचीन शिव मंदिरों क्षेत्रफल लगभग छह हजार वर्ग फुट है और उनको मिला देनेसे काशी विश्वनाथ मंदिर का लगभग ढाई हजार वर्ग फीट का वर्तमान परिसर अब लगभग साढ़े आठ हजार वर्ग फीट में विस्तृत हो जाएगा और इस पर कुल एक करोङ 51 लाख रुपए तक खर्च होने का अनुमान है।

यह सारा कार्य इस वर्ष जून तक पूर्ण हो जाएगा और इस कार्य का पहला चरण मार्च तक ही पूर्ण हो जाने की संभावना है। गोकर्ण ने बताया कि रानी अहिल्याबाई द्वारा वर्ष 1780 में बनाए गए विश्वनाथ मंदिर के वर्तमान परिसर में विस्तार के बाद इसमें भक्तों को ध्यान, योग, यज्ञ, भजन एवं कीर्तन के लिए भी स्थान उपलब्ध होगा जिससे देश विदेश से आये भक्तों को भगवद् आराधना का पूरा अवसर प्राप्त हो।

उन्होंने बताया कि भगवान शिव की प्रदक्षिणा का भी नवनिर्माण किया जा रहा है। संपूर्ण नए परिसर में फर्श और दीवारों पर सफेद संगमरमर के पत्थर लगाए जा रहे हैं और दीवारों पर लगाए जाने वाले संगमरमर के पत्थरों पर भगवान शिव की आराधना के मंत्र एवं शास्त्रीय श्लोक उकेरे जाएँगे। इसके अलावा दीवारों के पत्थरों पर भगवान शिव के माहात्म्य से जुडी कथाओं के चित्र भी बनाए जाएँगे।

परिसर के विस्तारित हिस्से में आधा से अधिक कार्य अभी संपन्न हो गया है और इसमें प्राचीन मंदिर की वास्तु के अनुरूप शिलाओं पर कलाकारी की जा रही है। नए परिसर के खंभे और दीवारें चुनार के पत्थरों से निर्मित हो रही हैं और इस कार्य में राजस्थान एवं देश के अनेक हिस्सों से आए सैकड़ों शिल्पी दिन-रात लगे हुए हैं।

प्राचीन मंदिर के शिखर पर महाराजा रणजीत सिंह ने उन्नीसवीं सदी में लगभग दस क्विंटल सोने का पत्र चढ़वाया था और उसके शिखर के अनुकूल ही नए परिसर में शामिल किए गए दो मंदिर शिखरों को बनाया जाएगा और आवश्यक होने पर मुख्य मंदिर परिसर के शिखर से उन्हें कुछ नीचे रखा जाएगा।

गोकर्ण ने बताया कि मंदिर के परिसर के विस्तार का कार्य पूर्ण होने पर श्रृंगेरी के शंकराचार्य को बुलाकर इसका उद्घाटन कराने की योजना है जिसके लिए उनसे संपर्क किया गया है और पूरी संभावना है कि उनकी सहमति मिल जाएगी।
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