जल्द ही उप्र के नौनिहाल बरसों से चले आ रहे पढ़ने-पढ़ाने के तरीकों से निजात पा सकेंगे। अब न तो उन्हें रट्टा लगाकर सवालों के जवाब देने पड़ेंगे और न ही उनका ज्ञान केवल किताबों तक सीमित रहेगा। अब वे जीवन के अनुभवों के आधार पर उसे सहेजेंगे। ऐसा संभव होगा प्रदेश में नई शिक्षा पद्धति से जुड़कर।
प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों से होने वाली इस शुरुआत में राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद ने बड़ी भूमिका निभाई है। नए तरीके से पारंपरिक पठन-पाठन शैली पर विराम लगेगा। इसमें न सिर्फ बच्चों का मानसिक विकास होगा, बल्कि शिक्षकों के अध्यापन के तरीकों में भी बदलाव लाए जाएँगे।
यही नहीं, परीक्षाओं में भी ऐसे सवाल पूछे जाएँगे जिसमें दिमागी कसरत ज्यादा हो। नई पद्धति में बच्चे को अपनी मातृभाषा बोलने का पूरा अधिकार दिया जाएगा, साथ ही लचीले मूल्यांकन के तरीके पर ध्यान दिया जाएगा।
एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम प्रमुख प्रोफेसर संतोष ने बताया कि प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को समाज से जोड़कर पढ़ाने की यह पद्धति वैसे तो देशभर में लागू हो चुकी है, लेकिन उप्र इससे अछूता था। उन्होंने कहा कि इस बाबद नया पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। साथ ही शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए 21 पुस्तकें तैयार की गई हैं। नईदुनिया
|