अच्छा दिखना, चमकदार चेहरा होना यह भूख किसी-किसी मनुष्य में इतनी ज्यादा है कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है। युवाओं की ही बात करें तो आजकल वे अपने चेहरे को कील-मुँहासों से मुक्त रखने के लिए नई तरह की औषधि का सेवन कर रहे हैं। जो औषधि विवाहोपरांत लेने की है, वह 18 साल की उम्र में ही लेने लगे हैं।
आज के कई युवा कील-मुँहासों से रहित चेहरा रखने के लिए गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करने लगे हैं। युवाओं से इन दिनों जब पूछा जाए कि वे किसके साथ डेटिंग करना पसंद करेंगे, तो जवाब मिलता है कम से कम उसके साथ तो नहीं, जिसे मुँहासे हैं। अपनी त्वचा को चमकदार रखने के लिए युवा इस तरह की गोलियों का सेवन करने लगे हैं।
फायदा इस तरह से: हार्मोन में आने वाले परिवर्तन के कारण कील-मुँहासे होते हैं। गर्भ निरोधक गोलियों का जहाँ तक सवाल है तो वे इस तरह के हार्मोन परिवर्तन को नियंत्रित कर देती हैं। बिना डॉक्टरों की सलाह के युवाओं ने इसका सेवन करना शुरू कर दिया है।
ऐसी हैं परेशानियाँ : जसलोक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिश्मा ढिल्लन पई का कहना है कि इस तरह की दवाओं का सेवन करने से दूसरी परेशानियाँ ख़ड़ी हो रही हैं। उनके पास पिछले 6 माह में ऐसे 35 से 40 मामले सामने आए हैं।
किशोरावस्था में कई अहम हार्मोन परिवर्तन होते हैं, इसी वजह से कुछ युवाओं को मुँहासे होने लग जाते हैं। गर्भ निरोधक दवाओं के कारण प्रोजेटेरॉन और ओएस्ट्रोजेन जैसे हार्मोन नियंत्रित होते हैं और इसीलिए युवाओं ने इसका सेवन शुरू कर दिया है।
कुछ नई तरह की गर्भ निरोधक दवाओं में ड्रॉसपेरिनॉन को नियंत्रित करने की औषधि है, जिसका महिला की त्वचा और बालों पर खासा असर प़ड़ता है। हालाँकि डॉक्टरों का तो यहाँ तक कहना है कि इन दवाओं को बिना परामर्श के लेने से वजन बढ़ सकता है, अनियमित रक्तस्राव हो सकता है। साथ ही नसों में खून के थक्के जमा होने की भी शिकायत हो सकती है।
फिर क्या किया जाए : दरअसल हार्मोन में परिवर्तन लंबी उम्र तक चलते रहता है। इसके लिए कुछ प्राणायाम काफी कारगर माने जाते हैं। इनमें ना़ड़ी शोधन प्राणायाम शामिल है। इसके अलावा कुछ बंध और मुद्राएँ भी हैं, जो हार्मोन परिवर्तन के हालात में शरीर को संतुलित रखती हैं और त्वचा भी साफ-सुथरी रहती है।
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