सरकार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की सजा में छूट देने का निर्णय लिया है। पाँच वर्ष से अधिक की वास्तविक सजा काट चुकी महिला कैदियों, नेत्रहीन और कैंसर तथा क्षयरोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त बंदियों को भी मुक्त कर दिया जाएगा।
इस संबंध में जेल विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आजीवन कारावास की सजा काट रहे 18 दिसंबर 1978 के पूर्व के ऐसे बंदी, जिन्होंने 15 वर्ष की सजा भुगत ली है उन्हें बिना शर्त रिहा कर दिया जाएगा।
इसी तरह 18 दिसंबर 1978 के बाद के आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों जिनकी 14 वर्ष की सजा पूरी हो चुकी है तथा दंडादेश के 20 वर्ष पूर्ण कर लिए हों, उन्हें भी बिना शर्त आजाद कर दिया जाएगा। ऐसी महिला बंदी जिन्हें आजीवन कारावास से दंडित नहीं किया गया है और पाँच वर्ष से अधिक का वास्तविक दंडादेश भुगत लिया है उन्हें भी रिहाई दे दी जाएगी।
शासन के निर्णयानुसार आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को छोड़कर दस वर्ष से अधिक के कारावास से दंडित कैदियों की सजा में चार महीने की छूट दी जाएगी।
इसी तरह पाँच वर्ष से अधिक और दस वर्ष तक के कारावास से दंडित कैदियों को तीन माह की, तीन वर्ष से अधिक और पाँच वर्ष तक के कारावास से दंडित बंदियों को दो माह की, दो वर्ष से अधिक और तीन वर्ष तक के कारावास से दंडित बंदियों को डेढ माह की, एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक के कारावास वाले बंदियों को एक माह की, छह माह से अधिक और एक वर्ष तक के कारावास से दंडित बंदियों को 15 दिन और छह माह या उससे कम समय की सजा काट रहे बंदियों को सात दिन की छूट दी जाएगी।
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