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छिड़क भर दो अच्छे-अच्छे नहीं फटकते!
कहा तो यह जाता है कि शराब पिए हुए व्यक्ति के मुँह कोई नहीं लगता। अच्छे-अच्छे दूर भागते हैं। यही फार्मूला खेती में फिट बैठ गया है। उत्तरप्रदेश का आगरा मंडल आलू की खेती के लिए जाना जाता है। आलू को कीड़े से बचाने के लिए शराब का इस्तेमाल किया जाता है और फिर किसी कीटनाशक की भी जरूरत नहीं होती।

आगरा से 20 किमी दूर खनदौली में आलू के किसान यही नुस्खा आजमाते है। किसान देसी शराब को पानी में मिलाकर पौधों पर छींट देते हैं। इससे पौधों के पास की़ड़े नहीं आते। इसको छींटने के बाद कीटनाशकों की जरूरत नहीं होती।

राजा बलवंत सिंह महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह का कोई सबूत तो नहीं है, लेकिन शराब पानी के साथ छींटने में कोई नुकसान भी नहीं है। किसानों और कोल्ड स्टोरेज वाले यह नया तरीका अपनाते हैं और उनके आलू सुरक्षित रहते हैं।

कुछ दिनों पहले अचानक ठंड बढ़ने से किसान चिंतित जरूर थे, लेकिन अब नहीं हैं। पूरे देश में सबसे ज्यादा आलू यहीं पैदा होता है। इसके अलावा यहाँ के आलू की किस्म भी सबसे अच्छी मानी जाती है।

ज्यादा बिकने लगी शराब : जहाँ तक इसके असर की बात है तो क्षेत्र में देसी शराब ज्यादा बिकने लगी है। आगरा मंडल के सातों जिलों के किसानों को इस बार आशा है कि फसल जमकर होगी। बिजली कटौती और रासायनिक खादों की कालाबाजारी के बाद भी वे आशान्वित हैं। नईदुनिया
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