उत्तरप्रदेश में व्यापारियों के लिए अब मिलावटी दूध, खाद्य तेल और अन्य मिलावटी आहार बेचने में परेशानी हो जाएगी। इसके लिए सरकार ने एक तरीका ढूँढ लिया है।
केंद्र सरकार ने एक अत्याधुनिक तकनीकी से लैस प्रयोगशाला स्थापित कर दी है, जो मिलावटी खाद्य पदार्थों की रोकथाम कर सकेगी। क्षेत्रीय खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र बाजार में तेजी से बढ़ रहे ब्रांड की क्वालिटी की भी जाँच करेगी। इसमें बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाला मिनरल वॉटर भी होगा।
केंद्र के निदेशक आरपी सिंह का कहना है कि पहले खाद्य नमूनों की रिपोर्ट मिलने में काफी हफ्ते लग जाते थे, परंतु अब ये कुछ ही घंटों में मिल जाएगी।
प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो यह तक बता देते हैं कि मिनरल वॉटर में क्या-क्या है। तेजी से ब़ढ़ रहे कीटनाशकों के उपयोग की वजह से कई बार फल और सब्जियाँ जहरीले हो जाते हैं। नई प्रयोगशाला में जहरीले अवयवों की मात्रा भी पता चल सकेगी और तत्काल नतीजा भी मिलेगा।
घी या मक्खन में मौजूद मिलावट को एकदम बताया जा सकेगा। इसके अलावा पदार्थ में कितना स्टेरॉयड है, इसकी भी जानकारी मिलेगी। प्रयोगशाला का ट्रायल रन चल रहा है और फरवरी से यह काम करना शुरू कर देगी। नईदुनिया
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