छत्तीसगढ़ की एक संस्था 'नेताजी सुभाष मंच' ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को 'भारत रत्न' से सम्मानित करने की माँग की है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को भारतरत्न दिए जाने की माँग के बाद कई और हस्तियों को यह सम्मान देने की माँग उठी है। इसी बीच मंच ने भी अपनी यह माँग एक बार फिर उठाई है।
मंच के संयोजक शैलेंद्र तिवारी ने कहा कि हालाँकि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की इस बात से हम सब सहमत हैं कि नेताजी की शख्सियत से बड़ा इस देश में कोई सम्मान नहीं है, लेकिन इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता कि भारतरत्न जैसे देश के सर्वोच्च सम्मान के लिए उनको छोड़कर न जाने कितने नामों को उछाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम इस सम्मान के लिए उभरकर आ रहे हैं उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन क्या इनमें से एक भी व्यक्ति नेताजी की बराबरी का है और उनका भारत के जनमानस पर जो अमिट प्रभाव है उसका एक चौथाई भी इनमें से किसी को हासिल है।
तिवारी ने बताया कि 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर ने नेताजी को भारतरत्न देने का ऐलान कर दिया था लेकिन उनकी मृत्यु के बारे में शुरू से ही चली आ रही अटकलों के कारण ऐन वक्त पर उनको यह सम्मान नहीं देने का निर्णय हुआ।
उनके मुताबिक इस संबंध में जितनी अफवाहें हैं, उनको मानने का कोई कारण नहीं है क्योंकि नेताजी अदम्य साहस और निर्भयता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने 1945 की हवाई दुर्घटना की चर्चा करते हुए कहा कि आज 111 साल की आयु में उनके जीवित होने का भ्रम पालना भी बिल्कुल बेमानी है। कहा जाता है कि इस हवाई दुर्घटना में नेताजी की मौत हो गई थी।
उनके मुताबिक वे पिछले बीस वर्षों में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत, पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर, एचडी देवगोडा और अटलबिहारी वाजपेयी तथा पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से मिलकर यह माँग रख चुके हैं।
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