पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के शिकार से दुखी हुई विदेशी महिला ने अब अपना जीवन वन और वन्य जीवों को बचाने के लिए समर्पित कर दिया है।
पन्ना जिले में केन नदी के तट के अनुपम सौन्दर्य एवं राष्ट्रीय उद्यान में घने जंगल और वादियों की प्राकृतिक छटा के बीच लंदन निवासी चित्रकार महिला जेनिफर बक्सटन ने तीन वर्ष पूर्व जब पहली बार बाघिन को स्वच्छंद विचरते देखा तो मारे खुशी के झूम उठी थीं।
कुछ ही दिनों बाद शिकारियों द्वारा इस बाघिन को मार डाले जाने की खबर से संवेदनशील जेनिफर को गहरा आघात लगा और अब उसने अपना पूरा जीवन वन और वन्य प्राणियों को बचाने में समर्पित कर दिया है।
जेनिफर अब वर्ष में एक या दो बार पन्ना आती हैं और केन नदी के किनारे बने ट्री हाउस में दिन-रात पेंटिंग बनाती हैं। समय मिलते ही वह ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के बीच जाकर प्रकृति एवं पर्यावरण रक्षा की अलख जगाती हैं।
उद्यान के किनारे मंडला गाँव के एक जीर्ण-शीर्ण विद्यालय का जेनिफर के प्रयासों से कायाकल्प हो चुका है। इस स्कूल में पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जेनिफर की बनाई पेंटिग से जो पैसा मिलता है उसे इस स्कूल के विकास में खर्च किया जाता है।
अब तक एक हजार से अधिक पेंटिंग की बिक्री से एकत्र हुए लगभग चार लाख रुपए इस स्कूल के भवन और अधोसंरचना पर खर्च किए जा चुके हैं। हाल ही में पन्ना आईं जेनिफर ने कहा कि यहाँ आकर उसे बहुत सुकून मिलता है। इस जगह की खूबसूरती और जंगल के राजा बाघ को हर हाल में बचाया जाना चाहिए। बाघ नहीं बचेगा तो जंगल का सारा रोमांच ही समाप्त हो जाएगा।
जेनिफर ने बताया कि वर्ष 2004 में जब वह भारत भ्रमण पर आईं तो उन्होंने पहली बार बाघिन को स्वच्छंद विचरते देखा था। उन्हें उस समय बडा आघात लगा जब उस बाघिन को मार डाले जाने की खबर मिली।
जेनिफर ने अपनी पेंटिंग के जरिये बाघिन को जीवित रखा है और उसकी यह सबसे चर्चित चित्रकारी है। इसकी एक हजार से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं, जिससे प्राप्त राशि वह मंडला के स्कूल पर खर्च कर रही हैं। यह निजी विद्यालय भवन अब खासा सुसज्जित हो गया है और भवन आदि के अलावा वहाँ पर्याप्त शिक्षक हैं। सभी कक्षाएँ समुचित तरीके से चल रही हैं।
जेनिफर विद्यालय के तीन होनहार छात्रों सरिता नामदेव, रश्मि नामदेव और अजयसिंह राजपूत के नाम से मंडला के ग्रामीण बैंक में खाता खोलकर पैसा भी जमा कर रही हैं जिससे वे उच्च शिक्षा हासिल कर सकें।
जेनिफर की पेंटिंग्स यहाँ के प्री-रिसोर्ट के संचालक श्यामेन्द्रसिंह की पर्यटक झोपड़ियों में बिक्री के लिए रखी गई हैं। बिक्री से मिली राशि स्कूल को दी जाती है। वे स्वयं लंदन में पेंटिंग बिक्री से एकत्र राशि यहाँ भेज देती हैं।
उन्होंने ने बताया कि वह शीघ्र ही प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह से मिलने का प्रयास करेंगी। बाघों को बचाने की अपील के साथ ही यहाँ के बच्चों की पर्यावरण संरक्षण को प्रेरित करती हुई पेंटिंग्स भी उन्हें भेंट करेंगी।
ब्रिटिश चित्रकार ने बताया कि वह जीवनपर्यन्त बाघों को बचाने की मुहिम में लगी रहेंगी और उनके बाद पुत्र टॉमस बक्सटन इस काम को आगे बढ़ाएगा। जेनिफर इस बात से बहुत उत्साहित हैं कि उनके रचनात्मक पहल से विद्यालयीन बच्चों और क्षेत्र के ग्रामीणों में वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रति अभिरुचि पैदा हुई है।
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