बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी अहमदनगर जिला कलेक्टर कार्यालय के आदेश के खिलाफ जल्द ही बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँगी क्योंकि शिर्डी के नजदीक एक भूखंड पर उनके स्वामित्व को सौदे में अनियमितता के चलते खारिज कर दिया गया है।
रानी मुखर्जी के वकील नाना साहेब चौधरी ने शिर्डी से बताया कि इसी महीने हुई अंतिम सुनवाई के बाद अनुमंडल अधिकारी (एसडीओ) श्रीरामपुर ने भूखंड की बिक्री के करार से रानी मुखर्जी का नाम हटाने का आदेश जारी किया और उसका कब्जा ले लिया। हम उस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँगे।
बताया जाता है कि रानी मुखर्जी ने शिर्डी के निकट एक अहस्तांतरणीय कृषि भूमि के लिए दिसंबर 2005 में 33 लाख रुपए अदा किए थे। खरीद के बाद रानी ने पंजीकरण के लिए एक लाख 32 हजार रुपए का स्टांप शुल्क अदा किया, लेकिन भूखंड का स्वत्वाधिकार उनके नाम हस्तांतरित नहीं किया जा सका क्योंकि वह एक किसान का था।
रानी के वकील ने कहा हम जिला प्रशासन के निष्कर्ष से असहमत हैं। भूखंड को कृषि भूमि बताया गया है और किसी गैर कृषक के नाम हस्तांतरण के लिए सरकार से विशेष अनुमति लेनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन भूखंड पहले से ही गैर कृषि भूमि थी इसलिए सीलिंग कानून की धारा 47 के तहत इस पर सीलिंग लागू नहीं होता। 1981 में तहसीलदार ने उसे गैर कृषि भूमि घोषित किया और इस आदेश को कभी चुनौती नहीं दी गई।
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