गुजरात में गोधरा की घटना के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े बिलकीस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में शुक्रवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने एक पुलिस अधिकारी सहित 13 लोगों को दोषी करार दिया।
अदालत ने सात अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। मामले की सुनवाई गुजरात से हटाकर मुंबई में की गई थी। दोषियों को सजा सोमवार को सुनाई जाएगी। इस मामले में कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
गौरतलब है कि बिलकीस के साथ सांप्रदायिक हिंसा के दौरान सामूहिक बलात्कार किया गया था। उस वक्त उसे छह माह का गर्भ था। बिलकीस दंगों के दौरान उसके परिवार के सदस्यों की हत्या और बलात्कार की भी प्रमुख गवाह थी।
घटना 3 मार्च, 2002 को मध्य गुजरात में दाहोद जिले के राधनपुर गाँव में घटी थी। दंगाइयों ने उसके जिन परिजनों को मार डाला था उनमें बिलकीस की माँ, दो बहनें और एक तीन वर्षीय बच्चा शामिल था।
सीबीआई ने इस प्रकरण में 20 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। एक आरोपी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। आरोपियों में छह पुलिसकर्मी और एक डॉक्टर दंपति शामिल था। पुलिसकर्मियों पर जाँच में कोताही बरतने और सबूतों को नष्ट करने तथा डॉक्टर दंपति पर सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप थे।
गुजरात दंगों का यह पहला प्रकरण था, जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे और यह प्रकरण वडोदरा के बेस्ट बेकरी कांड के बाद दूसरा प्रकरण था, जिसकी सुनवाई गुजरात से बाहर करने का निर्देश उच्चतम न्यायालय ने दिया था।
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