गोवा विधानसभा का सत्रावसान कर दिया गया है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने वाले अपने तीन विधायकों पर लगाम लगाने के लिए उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
इन तीनों विधायकों के सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण सरकार अल्पमत में आ गई है तथा राज्य में ताजा राजनीतिक संकट पैदा हो गया है।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस राज्य में सात माह पुरानी दिगम्बर कामत सरकार को बचाने के रास्ते ढूँढने के बारे में विचार-विमर्श के लिए कांग्रेस तथा राकांपा के केन्द्रीय नेता गोवा आ रहे हैं। दो मंत्रियों के त्यागपत्र देने समेत समर्थन वापस लेने वाले तीनों विधायक अपने रुख पर अड़े हुए हैं और उन्होंने अपना फैसला पलटने से इनकार कर दिया है।
केन्द्रीय मंत्री तथा राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल अपने विधायकों से विचार-विमर्श कर रहे हैं और ऐसी रिपोर्ट है कि प्रदेश राकांपा ने एक प्रस्ताव रखा है कि पार्टी को सरकार के समर्थन से सरकार बनानी चाहिए। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बीके हरिप्रसाद भी पार्टी कार्यकर्ताओं से बात कर रहे हैं।
एक निर्दलीय विधायक विश्वजीत राणे ने भी कल रात समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की 40 सदस्यीय विधानसभा में संख्या घटकर 19 हो गई है।
समर्थन वापस लिए जाने से पूर्व सत्तारूढ़ गठबंधन की सदस्य संख्या 23 थी, जिनमें कांग्रेस के 16, राकांपा के 3, सेव गोवा फ्रंट के 2 तथा 2 निर्दलीय शामिल थे। यूनाइटेड गोवा डेमोकेटिक पार्टी के विधायक अतांसियो मोनसेराते असंबद्ध हैं।
विपक्षी भाजपा के 14 तथा एमजीपी के दो सदस्य हैं। एक और पार्टी विधायक श्याम सतारदेकर के विधानसभा छोड़ने के फैसले से भी सरकार को ताजा संकट का सामना करना पड़ रहा है। इससे उसका संख्या बल और कम हो गया है। आज कैबिनेट की सलाह पर राज्यपाल एस.सी. जमीर ने विधानसभा का सत्रावसान कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने इस कदम की आलोचना की और वे सदन में जाकर अध्यक्ष के आसन के समक्ष बैठ गए।
महत्वपूर्ण विनियोग विधेयक पर चर्चा कराने के लिए सदन की बैठक शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले यह कदम उठाया गया। इस विधेयक के गिरने की आशंका थी, जिससे अंतत: सरकार गिर जाती।
व्हिप जारी किए जाने का संकेत देते हुए पवार ने दिल्ली में कहा कि उनकी पार्टी के वरिष्ठ सहकर्मी गोवा विधानसभा के अध्यक्ष के नाम एक पत्र लेकर जा रहे हैं, जिसमें उन्हें सूचित किया गया है कि विधायकों की कार्रवाई दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत आती है।
राकांपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस और राकांपा ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और उन्हें चुनाव समझौते का सम्मान करना चाहिए।
|