राजद के सुप्रीमो और रेलमंत्री लालू प्रसाद की जीवनी अब बिहार के सरकारी स्कूलों के आठवीं कक्षा के हिंदी पाठ्यपुस्तक में नहीं पढ़ाई जाएगी।
बिहार के सरकारी स्कूलों की आठवीं कक्षा की हिंदी पाठ्यपुस्तक गद्य सोपान में वर्ष 1994 से लालू की जीवनी पर आधारित 'मिट्टी का गौरव' पाठ पढ़ाया जा रहा है। अब इस पाठ को छात्र नहीं पढ़ पाएँगे।
इस अध्याय में बिहार की तीन विभूतियाँ भोला पासवान शास्त्री, कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद की जीवनी के बारे में बताया गया है कि इन लोगों ने किस तरह से बिलकुल निचले तबके से उठकर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की। राज्य के मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार ने बताया कि सरकार ने यह निर्णय लिया है कि इस पूरे अध्याय की जगह महान दलित समाज सुधारक महात्मा ज्योति बा फुले की जीवनी को शामिल किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से इस अध्याय की इस पाठ्यपुस्तक से अब विदाई हो जाएगी।
जब उनसे पूछा गया कि सरकार पाठ्यपुस्तक में किए जाने वाले बदलाव के बाद क्या इसे औपचारिक रूप से पाठ्यक्रम में शामिल करेगी, तो प्रधान सचिव ने बताया कि अगले शैक्षणिक सत्र यानी इस वर्ष के अप्रैल महीने से यह पुस्तक छात्रों को उपलब्ध होगी।
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