इस्लाम के विवादित अहमदिया समुदाय के मौलवियों ने कहा कि मध्यकाल में महिलाओं से जायदाद और गुलाम की तरह व्यवहार किया जाता था और पैगंबर मोहम्मद साहब ने महिला अधिकारों को इस्लाम और समाज में मान्यता दी।
मौलाना सैयद कलीमुद्दीन अहमद ने बताया पवित्र कुरान से पहले महिलाओं को किसी रूप में अच्छा नहीं माना जाता था और उन्हें माता- पिता के लिए शर्म की बात माना जाता था।
अहमदिया अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2007 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने महिलाओं को समाज में अधिकार दिलाने के मुहिम की शुरूआत की। उस समय तक महिलाओं के साथ जायदाद और गुलाम जैसा व्यवहार किया जाता था।
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