पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में पूरे कार्यकाल तक पहली गैर कांग्रेस सरकार चलाने की उपलब्धि अपने नाम लिखवा चुके नरम मिजाज प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने दूसरी बार प्रदेश की कमान संभाल ली है।
पिछले कार्यकाल के दौरान कई सड़क परियोजनाएँ शुरू करने के कारण सड़क वाला मुख्यमंत्री के नाम से लोकप्रिय धमूल ने इससे पहले 1998 में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए उनका भाजपा विधायक दल का नेता चुना जाना औपचारिकता मात्र रही क्योंकि चुनावों से पहले ही पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपे जाने का ऐलान कर दिया था।
इस पद के लिए उनकी लड़ाई भाजपा के सख्त प्रशासक माने जाने वाले वरिष्ठ नेता शांता कुमार से थी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह भी चुनाव नतीजे आने तक किसी को भी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किए जाने के पक्ष में नहीं थे।
बहरहाल पार्टी की ओर से हाल ही में प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित किए गए पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पहल से धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर पार्टी चुनावों में उतरी।
पेशे से शिक्षक रहे धूमल का जन्म राज्य के हमीरपुर जिले के समीरपुर गाँव में 10 अप्रैल 1944 को हुआ। कैप्टन महंत राम और फुलमा देवी की संतान धूमल ने अंग्रेजी में स्नातकोत्तर और एलएलबी तक की शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ और गुरुनानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर से प्राप्त की।
विधानसभा चुनाव अभियान में पार्टी का नेतृत्व करने से पहले धूमल हमीरपुर में हुए पिछले लोकसभा उपचुनाव में विजयी हुए थे। इससे पहले 1989 और 1991 में वह लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं।
धूमल ने 1998 से 2003 तक हिमाचल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। राज्य में यह पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया। इससे पहले मुख्यमंत्री शांता कुमार ने राज्य में सरकार बनाई थी, लेकिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उनकी सरकार तीन अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के साथ बर्खास्त कर दी गई थी। हमीरपुर उपचुनाव में निर्वाचित होने से पहले 2003 से 2007 तक धूमल हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। धूमल को स्वच्छ छवि वाला राजनेता माना जाता है और उनका नरम स्वभाव उनकी खासियत है। शांता कुमार से प्रतिद्वंद्विता के बारे में धूमल का कहना है कि उनका अपने वरिष्ठ नेता के साथ किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। धूमल ने बमसान में कांग्रेस के बीसी लगवाल को पटखनी दी है। पूर्व सैनिक के बेटे धूमल का ज्योतिष विज्ञान में भी पूरा विश्वास है। मुख्यमंत्री नौ नंबर को अपना पसंदीदा अंक मानते हैं। यह अंक न केवल उनके मोबाइल फोन में शामिल है बल्कि कार के नंबर प्लेट पर भी शुमार है। (भाषा)
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