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देश में तलाक के बढ़ते मामले...
उम्र के उस दौर में जबकि जीवन का काफी लंबा सफर पति-पत्नी एक साथ तय करते हैं तो माना जाता है कि वे एक-दूसरे की जरूरत को बेहतर ढंग से समझते हैं, लेकिन अब भारत में भी विदेशों की तरह, वृद्धावस्था में तलाक के मामले देखे जा रहे हैं।

उप्र की राजधानी के पारिवारिक न्यायालय में देखें तो यहाँ तलाक के 60 फीसदी से ज्यादा मामले ऐसे हैं, जिनमें 45 से 60 वर्ष की आयु के पति-पत्नियों के बीच एक-दूसरे से तलाक माँगा गया है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अधिकतर मामलों में अलग होने की पहल पति ने की है।

पिछले छः-सात वर्षों में बहुतायत में आए इस तरह के मामलों ने खुद पारिवारिक न्यायालय को अचंभे में डाल दिया है। इसके लिए विधिवेत्ता जहाँ बचपन में कर दी गई शादी को जिम्मेदार मान रहे हैं, वहीं आधुनिक जीवनशैली भी इन मामलों को हवा देने में पीछे नहीं है।

उप्र के पारिवारिक न्यायालय में ऐसी पहल उन पतियों द्वारा सबसे ज्यादा की जा रही है जो उच्च पदों पर कार्यरत हैं। पारिवारिक न्यायालय हीनहीं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भी इस बात की काफी हद तक पुष्टि करता है। इस उम्र में बढ़ते तलाक के ग्राफ को देखकर न्यायालय से लेकर राज्य विधिक प्राधिकरण तक चिंतित हैं।

राज्य विधिक प्राधिकरण के तहत पारिवारिक न्यायालय की सलाहकार रही व मनोवैज्ञानिक डॉ. मधु पाठक कहती हैं कि इन वादों में वादी केवल 'तलाक' की ही माँग कर रहे हैं। वे किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होते। वे बताती हैं, महिलाओं ने तलाक की गुहार तभी लगाई है जब उम्र के लंबे दौर में पति से मार खाते-खाते सब्र का बाँध टूट गया।

लिहाजा बच्चों की जिम्मेदारी पूरी होते ही इस रिश्ते से अलग होने का फैसला ले लिया। उधर न्यायालय के अधिवक्ता यह भी कहते हैं कि कुछ वर्षों से तलाक के वे मामले भी देखने को मिल रहे हैं जो वर्षों से कोर्ट में लंबित पड़े थे जिनका निस्तारण उन दोनों की युवावस्था की बजाय अब हो रहा है।

हाल ही में आए ऐसे ही मामले का हवाला देते हुए पारिवारिक न्यायालय के एक वरिष्ठ अधिवक्ता बताते हैं कि अभी पिछले दिनों 50 वर्षीय पत्नी और 53 वर्षीय पति के संबंधों की परिणति तलाक के रूप में हुई है। पति सरकारी विभाग में वरिष्ठ अधिकारी है। पत्नी सीधी-सादी घरेलू महिला है, जिसका शिक्षा से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है।

नाबालिग अवस्था में हुए इस विवाह ने एक-दूसरे को कुछ भी समझने का मौका नहीं दिया। उच्च पद पर तैनात पति ने अपने बच्चे के दायित्व से मुक्ति पाने के साथ पत्नी को साजिश के तहत तलाक का नोटिस भिजवा दिया। (नईदु‍निया)
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