उप्र की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की 'सोशल इंजीनियरिंग' का जादू गुजरात में तो नहीं चला, लेकिन अब उनकी नजर मध्यप्रदेश पर है।
गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण के सभी राज्यों में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में जुटीं सुश्री मायावती का अगला निशाना मध्यप्रदेश है, जहाँ वर्ष 2008 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। बसपा अध्यक्ष की नए साल में वहाँ दो बड़ी रैलियाँ करने की योजना है।
मध्यप्रदेश में पार्टी का वोट बैंक बढ़ाने के लिए बसपा अध्यक्ष पहले से गंभीर हैं। इसी के तहत उन्होंने यूपी में बहुमत की सरकार बनाने के तत्काल बाद राज्य सरकार के दो मंत्रियों श्रम मंत्री बादशाह सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र समेत पार्टी के दूसरे कद्दावर नेताओं को मध्यप्रदेश में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पार्टी से जोड़ने के काम में लगा दिया था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव निपटने के बाद बसपा अध्यक्ष के एजेंडे पर जो राज्य हैं, उनमें मध्यप्रदेश शामिल है। पार्टी को अपने पड़ोसी राज्य में सोशल इंजीनियरिंग को भारी सफलता मिलने की उम्मीद है।
यूपी के सीमावर्ती जिलों छतरपुर, सागर आदि में पार्टी की पहले से मजबूत पैठ है। श्रम मंत्री बादशाह सिंह का विधानसभा क्षेत्र भी मध्यप्रदेश से जुड़ा हुआ है और उनको वहाँ लगाने के पीछे नेतृत्व का यही गणित बताया जाता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार फिलहाल बसपा की 10 फरवरी को राजधानी भोपाल और 17 फरवरी को छतरपुर में दो बड़ी रैलियाँ करने की संभावना है। (नईदुनिया)
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