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सात को फाँसी, 178 को आजीवन कारावास
पिछले वर्ष बिहार की राजधानी पटना के व्यवहार न्यायालय ने हत्या, बलात्कार और फिरौती के लिए किए गए अपहरण एवं अन्य मामलों में सात व्यक्तियों को फाँसी और 178 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

त्वरित न्याय दिलाने के राज्य सरकार के प्रयासों के तहत गत वर्ष की तुलना में इस आकड़े में काफी बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष जहाँ एक भी दोषी को फाँसी की सजा नहीं मिली थी, वहीं इस वर्ष सात व्यक्तियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

गत वर्ष 107 व्यक्तियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि इस वर्ष यह आँकड़ा 178 पर पहुँच गया।

हत्या, बलात्कार और अपहरण के मामले के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम के विभिन्न मामलों की त्वरित सुनवाई के कारण जहाँ पिछले वर्ष इस अपराध के लिए केवल 151 लोगों को सजा दी गई थी वहीं इस वर्ष दोषी करार दिये गये 212 लोगों को सजा सुनाई गई।

कुल मिलाकर वर्ष 2007 के दौरान जहाँ 703 लागों को विभिन्न आपराधिक मामलों में सजा सुनाई गई वहीं वर्ष 2006 में केवल 512 दोषियों को सजा सुनायी जा सकी थी।

वर्ष 2007 में राज्य सरकार ने विशेष रुप से अपहरण और शस्त्र अधिनियम के मामले में गवाहों की पेशी पर अपना ध्यान केंद्रीत किया था। परिणामस्वरुप वर्ष 2006 में अपहरण के सात मामलों में जहाँ केवल 12 लोगों को सजा हो पायी थी वहीं इस वर्ष 16 मामलों में 45 दोषियों को सजा सुनाई गई।

वर्ष 2006 में शस्त्र अधिनियम के 115 मामलों में 151 दोषियों को सजा मिली थी जबकि वर्ष 2007 में इस अधिनियम के तहत 151 मामलों का निपटारा हुआ और 212 दोषियों को सजा सुनाई गई।

इस बीच वर्ष 2007 में सत्र न्यायालय के सुनवाई योग्य 1800 से अधिक मामलों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को सुनवाई के लिए सुपुर्द किया गया।

इन मामलों में केन्द्रीय प्रशासनिक अभिकरण की न्यायिक सदस्य साधना श्रीवास्तव के आवास में हुई लूट और हत्या का मामला और पटना विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रो. पापिया घोष की हत्या का चर्चित मामला भी शामिल है जिसकी सुनवाई अभी भी जारी है।

राजधानी में नवसृजित थानों को मिलाकर कुल 22 पुलिस थानों से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत को छह हजार से अधिक प्राथमिकी सौंपी गई, जिनमें पटना पुलिस ने 2300 से अधिक मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने विभिन्न मामलों में वर्ष 2007 के दौरान 2265 लोगों को न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेजा था। इन अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था।
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