पिछले 23 नवंबर को प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी तथा फैजाबाद अदालत परिसर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल हूजी के दो आतंकवादियों को एसटीएफ एवं लखनऊ पुलिस ने शनिवार सुबह बाराबंकी रेलवे स्टेशन के करीब गिरफ्तार कर लिया।
पकड़ा गया मोहम्मद तारिक कासमी आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी (हूजी) का उत्तरप्रदेश का प्रमुख है तथा दूसरा खालिद मुजाहिद हूजी एक्शन ग्रुप का मुखिया है। मोहम्मद तारिक कासमी के पास से सवा किलो आरडीएक्स, तीन डेटोनेटर, दो मोबाइल फोन तथा खालिद मुजाहिद के पास 9 अमोनियम नाइट्रेट राड सुपर पावर-90, तीन डेटोनेटर एक मोबाइल फोन तथा दो सिमकार्ड बरामद हुए हैं। इनके घरों से बड़ी मात्रा में हूजी के उर्दू में छपी सामग्री पुलिस ने बरामद की है। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था ब्रजलाल ने बताया कि इन आतंकवादियों को गिरफ्तार करने में एसटीएफ के साथ ही नवगठित आतंकवाद निरोधक प्रकोष्ठ उत्तरप्रदेश द्वारा यूपी में सीरिलय ब्लास्ट की घटनाओं में शामिल आतंकवादी संगठनों और उनके सदस्यों पर निरंतर नजर रखी जा रही थी।
इनकी सूचना पर एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झा के नेतृत्व में एसटीएफ टीम व लखनऊ पुलिस बाराबंकी रवाना हुई और वहाँ पहुँचकर शनिवार प्रातः 6.20 बजे बाराबंकी रेलवे स्टेशन के करीब दोनों आतंकवादियों को गिरफ्तार कर उनके पास से बम बनाने की स सामग्री बरामद की।
मोहम्मद तारिक कासमी हूजी की इंतजामियाँ का प्रमुख तथा खालिद मुजाहिद हूजी एक्शन ग्रुप का मुखिया है। मोहम्मद तारिक ही बम ब्लास्ट का निर्देश देता था और उसके निर्देशों को न मानने वाले को उसे शूट करने के निर्देश देने का अधिकार था। ब्रजलाल ने बताया कि आतंकवादियों से पूछताछ करने पर उन्होंने ने बताया कि आज हम लोग गुरु से मिलने आए थे, जो कहीं बाहर से यहाँ आने वाला था और यह सामान उसे देना था, जिसका बम बनाकर वह हमें देता और ऊपर से निर्देश मिलने पर इसका उपयोग किया जाना था। डॉक्टर के भेष में आतंकवादी : ब्रजलाल ने बताया कि मोहम्मद तारिक पुत्र रियाज अहमद जनपद आजमगढ़ के थाना रानी की सराय तथा खालिद मुजाहिद पुत्र स्व. जमीर निवासी जनपद जौनपुर के थाना मडियाहू के रहने वाले हैं। मोहम्मद तारिक हूजी का उत्तरप्रदेश का मुखिया है। वह इस संगठन से वर्ष 2003 से जुडा हुआ है। मोहम्मद तारिक पेशे से यूनानी डॉक्टर (हकीम) है।
सहारनपुर व मुजफ्फरनगर में अपने शिक्षा के दौरान मोहम्मद तारिक चरमपंथियों के संपर्क में आया और वर्ष 2005 से हूजी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगा। नवम्बर 2006 में हूजी आतंकवादी खालिद कश्मीरी जो इस समय तिहाड जेल में बंद है, खालिद मुजाहिद के साथ इसके घर पर आया था और पाकिस्तान में बैठे हूजी के मुखिया से फोन पर बातचीत कराकर उत्तरप्रदेश में हूजी की गतिविधियों की पूरी जिम्मेदारी इसे सौंप दी थी। आतंकवादी गतिविधियों के संचालन हेतु धन हवाला के माध्यम से तारिक के पास आने लगा जिसे यह अपने आतंकी साथियों तक पहुँचाता था।
20 मई, 2007 को हवाला से प्राप्त धन गोरखपुर में विस्फोट करने वाले आतंकवादियों को देने व विस्फोटक रखने के स्थानों की पहचान करने तथा अंतिम निर्णय हेतु मोहम्मद तारिक गोरखपुर गया था और वहाँ अपने साथियों के साथ घटनास्थल की पहचान की तथा विस्फोट की योजना को अंतिम रूप दिया।
इससे पहले भी दिसम्बर 2006 में खालिद कश्मीरी के निर्देश पर वह गोरखपुर विस्फोट के इरादे से गया था, परन्तु उस समय बम विस्फोट की घटना क्रियान्वित नहीं हो सकी थी। 17 नवम्बर को मोहम्मद तारिक के घर हूजी के 4 आतंकवादी साथी आए थे जो जून 2007 में ही मोहम्मद तारिक तथा खालिद मुजाहिद से लगातार संपर्क में थे। बाहर से आए आतंकवादियों ने मोहम्मद तारिक व खालिद को वाराणसी, फैजाबाद व लखनऊ में कचहरी परिसर में विस्फोट करने का इरादा और योजना बताई। यह भी बताया कि हमारा एक साथी बांग्लादेश से विस्फोटक के साथ वाराणसी में मिलेगा तथा उसके स्थानीय संपर्क इन शहरों में भी हैं।
हम लोग तीन ग्रुप में बँटकर स्थानीय संपर्कों के माध्यम से कचहरी परिसर मे बम प्लांट कर देंगे। इसी योजना को मूर्त रूप देते हुए बाहर से आए आतंकवादियों के कमांडर के निर्देश व योजनानुसार साइकिलों पर बैग में विस्फोटक रखकर कचेहरी में प्लांट कर दिया गया। साइकिलों का प्रबंध बांग्लादेश व कश्मीर से आए आतंकवादी के स्थानीय संपर्क सूत्रों द्वारा किया गया था।
मोहम्मद तारिक ने बताया कि फैजाबाद में दो अन्य आतंकवादियों के साथ उसने लखनऊ में दो अन्य आतंकवादियों के साथ खालिद मुजाहिद ने वाराणसी में बांग्लादेश से आए आतंकवादी ने अपने संपर्क सूत्रों के साथ बम प्लांट कराकर दुस्साहसिक घटना को अंजाम दिया।
गिरफ्तार दूसरा आतंकवादी खालिद मुजाहिद वर्ष 2001 व 2002 में अमरोहा में आलमियत की शिक्षा ग्रहण कर रहा था इसी दौरान उसका संपर्क अब्दुल रकीब तथा मस्टर रिझवान से हुआ। इन्ही दोनों ने खालिद मुजाहिद को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उल्लेखनीय है कि अब्दुल रकीब वर्ष 2003 में कश्मीर में मुठभेड़ में मारा जा चुका है तथा मास्टर रिजवान अप्रैल 2006 से महमूद मंडल आदि के साथ लखनऊ जेल में बंद है।
खालिद ने वर्ष 2003 में अब्दुल रकीब के साथ किश्तवाड़ की पहाड़ियों में जाकर आतंकी प्रशिक्षण लिया था और वहाँ से लौटकर चरमपंथी गतिविधियों में शामिल हो गया।
सज्जाद कश्मीर में गिरफ्तार : एसटीएफ की सूचना पर हूजी का एक अन्य सक्रिय सदस्य सज्जाद को आज कश्मीर में गिरफ्तार कर लिया गया है। जिसकी सूचना जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को दी है। एसटीएफ की टीम को पूछताछ के लिए जम्मू-काश्मीर भेजा जा रहा है।
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