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लिंगानुपात ने बढ़ाया देह व्यापार
कन्या भूण हत्याओं के कारण इस जिले में तेजी से गिरते लिंगानुपात से परेशान लोग अब उड़ीसा, बिहार और केरल तक से महिलाओं को खरीदकर ला रहे हैं और इसकी आड़ में देह व्यापार का कारोबार भी फलफूल रहा है।

जिले के पोहरी-पिछोर क्षेत्र में ऐसे तमाम मामले मिल जाएँगे, जहाँ उड़ीसा, बिहार और केरल तक से महिलाओं को खरीदकर लाया गया और अब उन्हें ब्याहता बनाकर रखा जा रहा है।

तेजी से घटती महिला आबादी ने महिला-पुरुष लिंगानुपात को गड़बड़ाकर रख दिया है और यह त्रासदी इसी की देन है।

शहर के बजरिया स्थित कथित रेड लाइट क्षेत्र में देह व्यापार जोरों पर है। यहाँ अभी तक एक जाति समुदाय विशेष की महिलाएँ ही देह व्यापार में लिप्त रहती थीं, मगर अब ऐसा नहीं है। समुदाय विशेष की युवतियों के साथ ही इस धंधे में अन्य वर्गों और समुदायों की युवतियों को भी जबरन उतारा जा रहा है।

जानकार बताते हैं कि अपहृत कर लाई गई युवतियों को दलालों ने इन वेश्यालयों को बेचा और अब उनसे धंधा कराया जा रहा है। ऐसे मामले पुलिस ने छापामारी कर पकड़े भी लेकिन यह त्रासदी ही है कि थमने के बजाए यह समस्या अधिक गहराती जा रही है।

शिवपुरी के पोहरी क्षेत्र में कुछ पिछड़ी जातियों में महिलाओं की खरीद-फरोख्त को सामाजिक रूप से हिकारत की नजर से नहीं देखा जाता, बल्कि इसे सहज स्वीकार्यता मिली हुई है। आज जो एक की ब्याहता है, कल वह किसी और को बिक जाए तो किसी को अचरज नहीं होता।

पिछोर क्षेत्र में तो एक समुदाय ऐसा है, जिसमें जितनी अधिक बार जो महिला बिके उसे समुदाय में उतना अधिक महत्व मिलता है।

शिक्षा के प्रचार-प्रसार से स्थिति में कुछ सुधार हो रहा है, लेकिन उतना नहीं जितना अपेक्षित है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे परिवार बहुतायत में मिलेंगे जिनमें उम्रदराज अविवाहित पुरुष हैं। समय पर सही लड़की नहीं मिलने के कारण उनका विवाह नहीं हो पाया है जबकि वे विवाह के इच्छुक थे।

शिवपुरी की रेड लाइट बस्ती में पुलिस ने हाल ही में छापामारी कर अठारह युवतियों को पकड़ा जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग बालाएँ थीं।

जिले के डाबरपुरा और टोरिया गाँव जिस्मफरोशी ही नहीं बल्कि महिलाओं की खरीद-फरोखत के लिए भी जाने जाते हैं और यहाँ की बालाएँ धौलपुर, नागपुर, मुम्बई और कोलकाता तक पहुँचाई जाती हैं।
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