शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ओम शांति ओम भले ही साल की सुपरहिट फिल्मों में शुमार हो, लेकिन यह फिल्म कश्मीर में अपना जादू नहीं चला पाई। यहाँ के एकमात्र सिनेमाघर में यह फिल्म केवल एक सप्ताह ही चली।
ऐसा नहीं है कि कश्मीर में किंग खान के प्रशंसक नहीं हैं या उनकी फिल्में यहाँ दर्शकों को पसंद नहीं आतीं। यहाँ के लोगों को सिर्फ यह डर है कि सिनेमाघर कहीं उनकी जिंदगी का अंत न कर दे।
वर्ष 1998 में कश्मीर के रीगल सिनेमा में एक ग्रेनेड हमला हुआ था, जिसमें चार व्यक्ति मारे गए थे।
ओम शांति ओम रिलीज होने के बाद नीलम सिनेमा में लगी और इसका प्रदर्शन बमुश्किल दस बार हुआ। इस फिल्म को टिकटों की बिक्री से मात्र 38,000 रुपए की आय ही हुई।
सिनेमाघर मालिकों का कहना है कि उनका कारोबार फायदेमंद नहीं है, बल्कि यह मुनाफा उनके लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी पर निर्भर करता है।
ओम शांति ओम देश के दूसरे थिएटरों में जब लगी तो टिकट खरीदने वालों की लंबी कतारें जुट गईं, लेकिन नीलम सिनेमा में टिकट विकेताओं को घंटों खरीदारों का इंतजार करना पड़ा।
कई बार तो एक भी दर्शक नहीं आया और शो रद्द करना पड़ा। 800 सीटों की क्षमता वाले हाल में कभी दर्शक आए भी तो गिने चुने। ज्यादातर सीटें खाली ही पड़ी रहीं।
कश्मीर में जब 1989 में आतंकवाद की शुरुआत हुई तो सिनेमा सहित मनोरंजन के प्रत्येक साधन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। अपनी जान बचाने के लिए लोगों को अपने धर्म निरपेक्ष मूल्यों को त्याग कर शरीआ या इस्लामी कानूनों का पालन करना पड़ा।
राज्य सरकार ने 1990 के दशक के आखिर में घाटी को सामान्य बनाने की ठानी और सिनेमाघर मालिकों को सब्सिडी देने का ऐलान किया ताकि उनका कारोबार एक बार फिर चल सके।
सरकार का यह हस्तक्षेप सिनेमा के कारोबार को बचा नहीं सका। घाटी के 15 में से ज्यादातर फिल्म थिएटरों को सुरक्षा बल एक-एक कर अधिग्रहित करते गए। अनंतनाग का हैवेन थिएटर, सोपोर की समद टॉकीज, श्रीनगर के शीराज और फिरदौस सिनेमाघरों में तो पिछले 18 साल से सुरक्षा बलों का कब्जा है।
रीगल, ब्राडवे और नीलम सिनेमाघरों ने 1990 के दशक के मध्य से फिर काम शुरू किया लेकिन फिल्म प्रेमियों की खुशी ज्यादा दिन नहीं रही।
नीलम पर उग्रवादियों ने ग्रेनेड हमला कर दिया। हमले में हालाँकि कोई फिल्म प्रेमी हताहत नहीं हुआ। रीगल में 1998 में हुए ग्रेनेड हमले में चार व्यक्ति मारे गए और कई घायल हो गए। इसके बाद रीगल में फिल्मों का प्रदर्शन बंद कर दिया गया।
ब्राडवे सेना की 15वीं कोर के मुख्यालय के बाहर स्थित है। इसे इसके मालिक ने घाटे की वजह से 2005 के शुरू में बंद कर दिया। कभी राज्य का सर्वश्रेष्ठ सिनेमाघर माना जाने वाला ब्राडवे बंद हुआ तो कुछ समय के लिए यहाँ एक बार शुरू किया गया। शीघ्र ही यह बंद हो गया। अब थिएटर नदारद हो चुका है और यहाँ होटल की इमारत खड़ी हो गई है।
जम्मू कश्मीर सरकार के सचिवालय से लगे करण नगर में उच्च सुरक्षा युक्त क्षेत्र में अब केवल नीलम सिनेमाघर ही चल रहा है। ओम शांति ओम को यहाँ मायूस होना पड़ा।
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