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खरगोन और साँवेर में भाजपा को झटका
कांग्रेस के अरुण यादव और सिलावट विजयी
मध्यप्रदेश में तीन चौथाई बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज भाजपा को करारा झटका देते हुए कांग्रेस ने खरगोन लोकसभा और साँवेर विधानसभा उपचुनाव जीत लिया है।

खरगोन में कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के कृष्णमुरारी मोघे को रिकॉर्ड एक लाख 18 हजार 638 मतों से परास्त कर यह सीट भाजपा से छीन ली। यादव को 392092 मत मिले जबकि मोघे को 273454 वोट मिले। भारतीय जनशक्ति उम्मीदवार संतोष झंवर 30215 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

साँवेर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के तुलसी सिलावट ने अपने निकटवर्ती प्रतिद्वंद्वी भाजपा के संतोष मालवीय को 9292 मतों से हरा दिया। सिलावट को 55179 वोट मिले जबकि मालवीय को 45887 वोट मिले। भारतीय जनशक्ति के रंजीत सोनकर 3671 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।

उपचुनाव के परिणामों ने मुश्किलों से घिरी भाजपा की मायूसी तथा परेशानी और बढ़ाई है, वहीं अब तक गुटीय दलदल और धड़ेबाजी में फँसी कांग्रेस में इस जीत से नए उत्साह और एकजुटता का संचार हुआ है।

खरगोन सीट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष यादव के पुत्र और पार्टी प्रत्याशी अरुण यादव की जीत ने भाजपा को जबर्दस्त आघात पहुँचाया है। वहीं इस विजय से सुभाष यादव का पार्टी में कद बढ़ा है और उनके खिलाफ गाहे-बगाहे उठने वाले असंतोष के स्वरों पर भी विराम लगने की संभावना है।

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि खरगोन में भाजपा के ताकतवर नेता और संसदीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रह चुके कृष्णमुरारी मोघे की पराजय की अनुगूँज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।

इस नतीजे से स्तब्ध भाजपा को गहराई से इस बात की पड़ताल करनी होगी कि राज्य के निमाड़ क्षेत्र के विकास पुरूष कहे जाने वाले मोघे पार्टी के इस गढ़ में हार कैसे गए।

प्रेक्षकों के अनुसार पिछले लंबे समय से प्रदेश कार्यकारिणी का गठन न होने और अन्य कारणों से लगातार पार्टी में अंसतुष्टों का निशाना बनने वाले सुभाष यादव के लिए यह जीत ऑक्सीजन की तरह है।

इस विजय से सुभाष यादव ने एक तरह से पार्टी आलाकमान तक यह संदेश पहुँचा दिया है कि तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वे अपने दम पर पार्टी को विजय द्वार तक पहुँचा सकते हैं।

प्रेक्षकों का मानना है कि खरगोन में व्यक्तिगत रूप से मतदाताओं की दृष्टि में मोघे की छवि बेहतर थी, लेकिन लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में सात पर काबिज भाजपा विधायकों के खिलाफ जनअसंतोष मोघे के खिलाफ गया।

साँवेर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की पराजय खरगोन की तरह अप्रत्याशित नहीं कही जा सकती है। भारतीय जनशक्ति से भाजपा में आए संतोष मालवीय को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद ही वहाँ पार्टी में असंतोष के स्वर बुलंद हुए थे।

इससे पूर्व शिवपुरी विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस से भाजपा में आए उम्मीदवार पर भरोसा जताकर हार का स्वाद चखने वाली भाजपा अब भविष्य में शायद इस तरह की प्रयोगधर्मिता से बचेगी।

डंपर खरीदी मामले को लेकर पहले ही विपक्ष का निशाना बने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के लिए यह पराजय और मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

इससे पूर्व सीधी लोकसभा तथा शिवपुरी और लांजी विधानसभा उपचुनावों में हार के बाद भाजपा के लिए सतर्क रहने की घंटी बजी थी, लेकिन खरगोन और साँवेर की पराजय ने निश्चित रूप से भाजपा तथा चौहान के माथे पर चिंता की लकीरों को और गहरा किया है।
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