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चुनावी चूल्हे पर चढ़ी चावल की हांडी
अगले वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में अभी से राजनीति गर्मा गई है। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के तीन रुपए किलो चांवल के मुकाबले, काँग्रेस की दो रुपए किलो चावल देने की घोषणा से ऐसा लगने लगा है कि अगला चुनाव चावल के मुद्दे पर ही लड़ा जाएगा।

राज्योत्सव के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने आगामी एक जनवरी से राज्य के सभी वर्गों के गरीबों को तीन रुपए किलो की दर से हर माह 35 किलो चावल वितरित करने की घोषणा की।

इसके बाद उन्होंने जिस तरह से इस योजना का प्रचार किया और इसके सफलता के लिए योजना बनाई, उससे प्रदेश में अगले वर्ष सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही कांग्रेस स्तब्ध रह गई।

कांग्रेस ने राज्य सरकार की घोषणा को अपने सत्ता में आने के सपने में सबसे बड़ी बाधा माना। तीन बाद जवाबी हमला करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत ने भी घोषणा कर दी कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो गरीबों को दो रुपए किलो की दर से चावल उपलब्ध कराया जाएगा।

डॉ.रमन सिंह ने अपनी प्रस्तावित योजना को सफल बनाने और इस योजना को घोटाले से बचाने के लिए वर्तमान में अनुसूचित जाति और जनजाति के गरीबों के लिए चल रही तीन रुपए किलो चावल की मुख्यमंत्री खाद्यान्न सुरक्षा योजना में प्रायोगिक तौर पर अनाज के सीलबंद पैकेट वितरित किए हैं। इसकी शुरुआत कवर्धा के बैगा आदिवासी बाहुल्य वाले गाँव से की गई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे आगामी एक जनवरी से सभी वर्गों के गरीबों के लिए इस योजना को लागू करेंगे, जिसके अंतर्गत 34 लाख परिवार आएँगे और प्रदेश की करीब 65 लाख आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित होगी।

इसके लिए शीतकालीन सत्र में पारित अनुपूरक बजट में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।

डॉ.सिंह की घोषणा का सबसे अधिक असर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पर पड़ा है। कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग यह भी मानता है कि तीन रुपए किलो चावल की घोषणा से भाजपा को ही सबसे अधिक नुकसान होगा।

मुख्यमंत्री की एक नवंबर को तीन रुपए किलो चावल देने की घोषणा की जनता में प्रतिक्रिया देखने के करीब 40 दिनों बाद कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.चरण दास महंत ने कांग्रेस की सरकार आने पर दो रुपए किलो चावल देने की घोषणा कर दी।

डॉ.महंत ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले गरीबी रेखा के नीचे और ऊपर के चांवल के कोटे का चार वर्षों से पर्याप्त उठाव नहीं होने से छत्तीसगढ़ का कोटा कम किया गया है, जो राज्य सरकार की खाद्यान्न के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की योजना गरीबों को तीन रुपए 40 पैसे प्रति किलो की दर से चावल उपलब्ध कराने की है, उसी योजना के चावल में प्रति किलो मात्र 40 पैसे अपनी ओर से वहन कर सरकार स्वयं को गरीबों के हितैषी दिखाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस तो चाहती है कि राज्य सरकार तीन रुपए किलो चावल बाँटे, क्योंकि उन्हें मालूम है कि सरकार की यह घोषणा भी आदिवासियों को गाय-बैल बाँटने की तरह की मात्र घोषणा ही रह जाने वाली है।

उधर प्रदेश भाजपा की प्रवक्ता सुश्री सरोज पाण्डे ने कांग्रेस की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कांग्रेसियों को ऐसी घोषणा करने के पहले राज्य के चावल के कोटे में हुई कटौती को फिर से शुरू कराना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डॉ.महंत सिर्फ चुनावी लाभ लेने के लिए ऐसी बात कर रहे हैं यदि उनके दावों में सच्चाई है तो वह कांग्रेस शासित राज्यों की एक भी ऐसी सरकार का उदाहरण पेश करें जो दो रुपए किलो की दर पर किसानों को चावल उपलब्ध करा रही है।
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