जिला उपभोक्ता फोरम ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में निजी संस्थान को छात्रों के साथ की गई धोखाधड़ी का हर्जाना देने के आदेश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता फोरम ने लखनऊ के बायो इन्फॉरमेटिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा छात्रों को धोखा देने के मामले मे क्षतिपूर्ति का आदेश दिया है।
इसके तहत तीन छात्रों को साढ़े चार लाख रुपए तथा दो छात्रों को साढ़े पाँच लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष ओपी श्रीवास्तव ने अपने निर्णय में कहा कि इन्स्टीट्यूट ने छात्रों को बड़े-बड़े सब्जबाग दिखाए और धोखाधड़ी कर अपनी संस्था में प्रवेश देकर छात्रों से मोटी फीस ली गई, जबकि न तो प्रवेश के समय और न ही बाद में इन्स्टीट्यूट कानूनी रूप से किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध था।
संस्थान की ओर से छात्रों को दी गई अंकसूची और डिग्री का बाजार में कोई मूल्य नही है। संस्था द्वारा अपने वादे एवं आश्वासन के आधार पर शिक्षण कार्यक्रम संचालित नही किया गया। नियमों के मुताबिक परीक्षा नही कराई गई।
छात्रों को प्रवेश के समय संस्था ने बताया गया था कि उसका शिक्षण कार्यक्रम राजस्थान की आईएएसई विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था जबकि प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का संचालन वहाँ से न कराकर उसका संचालन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइन्सेज रामपुर से कराया गया।
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